हादसे के बाद भी नहीं रुकी लूट: मृत युवक की क्षतिग्रस्त बाइक तक उड़ा ले गए चोर, दो गिरफ्तार

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 19 अगस्त 2026।
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक की टूटी-फूटी मोटरसाइकिल तक को नहीं बख्शा गया। पुसौर थाना क्षेत्र से सामने आए इस मामले ने न केवल आपराधिक प्रवृत्ति की गंभीरता को उजागर किया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पुलिसिंग और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया है।
हादसे से शुरू हुई कहानी, चोरी पर खत्म
घटना की पृष्ठभूमि 5 जुलाई 2026 की है, जब शत्रुघन मेहर अपनी मोटरसाइकिल (CG 13 BF 4628, होंडा साइन) से सब्जी बेचने रायगढ़ जा रहे थे। चिखली और रैबार के बीच एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
दुर्घटना के बाद पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को परिजनों को सौंप दिया था। मृतक के भाई संजय मेहर ने वाहन की खराब हालत के कारण उसे चिखली के पास अपने ढाबे के सामने खड़ा कर दिया।
40 दिन बाद गायब मिली बाइक
करीब डेढ़ महीने बाद, 18 अगस्त को जब संजय मेहर मौके पर पहुंचे, तो बाइक वहां से गायब थी। पहले इसे सामान्य चोरी समझा गया, लेकिन जांच ने कहानी को नया मोड़ दे दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू की। इसी दौरान पहले से जब्त एक संदिग्ध मोटरसाइकिल के पार्ट्स और इंजन नंबर (JC85AD4127825) की जांच परिवहन विभाग से कराई गई। रिकॉर्ड मिलान में यह इंजन मृतक शत्रुघन मेहर की बाइक का निकला।
पूछताछ में खुला राज
संदेह के आधार पर पुलिस ने मोहनीश पटेल (21 वर्ष, निवासी खोखरा) और शिव कुमार खुंटे (22 वर्ष, निवासी जूटमिल क्षेत्र) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। सख्ती से पूछताछ में दोनों ने बाइक के पार्ट्स चोरी करने की बात स्वीकार कर ली।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोटरसाइकिल के पार्ट्स बरामद कर उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
घटना से उठते सवाल
यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का भी प्रतीक बनकर सामने आया है। एक ओर जहां परिवार अपने सदस्य की मौत के सदमे से उबर नहीं पाया था, वहीं दूसरी ओर अपराधियों ने उसी हादसे से जुड़े अवशेष तक को निशाना बना लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनसान सड़कों और ग्रामीण इलाकों में खड़े वाहनों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त निगरानी नहीं है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि छोटे-छोटे अवसरों को भी अपराधी किस तरह भुनाने में लगे हैं।
पुलिसिंग पर कड़ा संदेश जरूरी
हालांकि पुसौर पुलिस ने मामले को सुलझाने में तेजी दिखाई है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त गश्त और निगरानी हो रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि हादसों के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों की सुरक्षा, निगरानी और रिकॉर्डिंग की एक स्पष्ट प्रणाली होनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध केवल बड़े आर्थिक घोटालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संवेदनहीनता की हद तक पहुंच चुके हैं। जरूरत है कि कानून का डर केवल कागजों में नहीं, जमीन पर भी उतना ही मजबूत दिखे।
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