विरोध प्रदर्शनों के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: SIR के बाद छूटे वोटरों के लिए चलेगा विशेष अभियान, घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ

मतदाता सूची सुधार को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा कदम: SIR के बाद छूटे वोटरों के लिए विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू

नई दिल्ली/रायपुर।
देश में मतदाता सूची की शुद्धता और व्यापकता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम उठाया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब आयोग ने उन पात्र नागरिकों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं, जिनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और विरोध की स्थिति बनी हुई है। आयोग का यह कदम मतदाता सूची को अधिक समावेशी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक सुधारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
घर-घर सत्यापन की नई रणनीति
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अब घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान वे प्री-SIR और वर्तमान मतदाता सूची की तुलना कर उन लोगों की पहचान करेंगे, जिनका नाम पहले सूची में था लेकिन बाद में हट गया, या जो किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से सूची में शामिल नहीं हो सके।
इसके साथ ही, पहली बार मतदान के पात्र बने युवा मतदाताओं को भी इस अभियान के दायरे में शामिल किया जाएगा।
फॉर्म-6 के जरिए होगा नामांकन
अभियान के तहत पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कराया जाएगा। BLO न केवल आवेदन भरवाने में सहायता करेंगे, बल्कि पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी संधारित करेंगे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक BLO को साप्ताहिक आधार पर लगभग 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन करने का लक्ष्य दिया गया है। पूरी प्रक्रिया को लगभग एक माह के भीतर पूरा करने का प्रयास रहेगा।
छूटे हुए मतदाताओं की होगी व्यवस्थित पहचान
आयोग के अनुसार, इस अभियान में तीन प्रमुख श्रेणियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—
1. वे मतदाता जिनका नाम पहले सूची में था लेकिन अब नहीं है
2. ऐसे पात्र नागरिक जो SIR प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके
3. पहली बार मतदान के योग्य युवा मतदाता
इन सभी की पहचान के लिए सूची मिलान (cross-verification) की विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राजनीतिक दलों की भूमिका भी तय
चुनाव आयोग ने इस अभियान में राजनीतिक दलों की भागीदारी भी सुनिश्चित की है। मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंटों को BLO द्वारा तैयार की गई सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे भी जमीनी स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।
अभियान पूरा होने के बाद बूथवार अंतिम सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी सौंपी जाएगी।
वंचित वर्गों तक विशेष पहुंच
निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि विशेष ध्यान उन वर्गों पर दिया जाए जो सामान्यतः पंजीकरण प्रक्रिया से वंचित रह जाते हैं। इनमें मजदूर बस्तियाँ, नाइट शेल्टर में रहने वाले लोग, बेघर नागरिक और हाशिए पर मौजूद समुदाय शामिल हैं।
इसके लिए बूथ स्तर पर विशेष शिविर (camp) लगाने की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिकों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
युवाओं और नए मतदाताओं पर फोकस
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पहली बार वोट देने वाले युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। आयोग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नए मतदाताओं की भागीदारी बेहद जरूरी है, इसलिए शैक्षणिक संस्थानों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से भी अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।
एक माह के भीतर समीक्षा और निगरानी
चुनाव आयोग ने इस पूरे अभियान की निगरानी मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और ईआरओ स्तर पर करने के निर्देश दिए हैं। नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मतदाता सूची की शुद्धता सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ी होती है।
चुनाव आयोग का यह अभियान आने वाले समय में देशभर में मतदाता सूची के पुनर्गठन और सुधार की एक नई मिसाल बन सकता है।
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