जनसुनवाई के बाद ‘रातों-रात दीवार’: शासकीय जमीन पर कब्जे के आरोप, मुआवजे की अटकलों ने बढ़ाई सियासी-प्रशासनिक हलचल


रायगढ़ 4 अक्टूबर 2026।
कोयलांचल क्षेत्र के गांवों में जमीन और मुआवजे को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच ग्राम पंचायत नवापारा एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां 29 सितंबर को आयोजित जनसुनवाई के बाद शासकीय एवं श्मशान भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों और प्रशासन के बीच नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जनसुनवाई के तुरंत बाद कुछ लोगों ने रातों-रात करीब चार से पांच फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सामान्य अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि संभावित भू-अर्जन और उससे मिलने वाले मुआवजे की उम्मीद से जुड़ा हुआ खेल हो सकता है। उनका तर्क है कि खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण भविष्य में जमीन अधिग्रहण की संभावना बनी रहती है, और ऐसे में कुछ लोग सरकारी जमीन पर निर्माण दिखाकर मुआवजे का दावा मजबूत करने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि मुआवजा केवल वैध स्वामित्व, दर्ज रिकॉर्ड और कानूनी पात्रता के आधार पर ही निर्धारित होता है। किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण या कब्जा मुआवजे का स्वतः अधिकार नहीं देता। ऐसे में यह पहलू प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।

ग्राम सभा में भी उठा मुद्दा, नहीं निकला समाधान
3 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभा में भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई। ग्रामीणों ने पंचायत के सामने कब्जे का मामला उठाया, लेकिन पंचायत स्तर पर समाधान नहीं निकल सका। सरपंच और सचिव ने इसे राजस्व विभाग का विषय बताते हुए आगे की कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय भेज दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, नवापारा में शासकीय, श्मशान और बाजार मद की जमीन पर अतिक्रमण के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। शिकायतों के बावजूद यदि समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के हौसले बढ़ते हैं।

प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल
रातों-रात दीवार खड़ी होने की घटना ने प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर इस तरह निर्माण हो जाए और प्रशासन को बाद में जानकारी मिले, तो यह व्यवस्था की गंभीर चूक मानी जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सीमांकन कराया जाए और जिस भूमि पर निर्माण हुआ है उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जमीन शासकीय या श्मशान मद की पाई जाती है, तो नियमानुसार तत्काल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।

पटवारी ने दी जांच रिपोर्ट की जानकारी
नवापारा हल्का पटवारी रज्जू राठिया ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर मौके का निरीक्षण किया गया है और जांच रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत कर दी गई है। अब आगे की कार्रवाई राजस्व विभाग के स्तर पर तय होगी।
समय रहते कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही इस तरह के कब्जे को नहीं रोका गया, तो आगे चलकर यह स्थायी निर्माण में बदल सकता है, जिसे हटाना प्रशासन के लिए और जटिल हो जाएगा।
बड़ा सवाल बरकरार
नवापारा की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संभावित मुआवजे की उम्मीद में सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिशों को नजरअंदाज किया जा सकता है?
फिलहाल नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या दीवार खड़ी होने के बाद ही कार्रवाई होगी या समय रहते सरकारी जमीन को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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