तलाईपाली के प्रभावित गांवों ने ठाना—कल NTPC के गेट पर बैठेंगे, दस मांगों पर अड़े

रायगढ़। सोमवार सुबह दस बजे रायकेरा स्थित NTPC तलाईपाली कार्यालय के सामने जब प्रभावित परिवार इकट्ठा होंगे, तो सिर्फ एक धरना नहीं होगा। आठ गांवों के किसान और युवा मिलकर कहेंगे—पुनर्वास अधूरा है, रोजगार वादे पर अटका है और सहमति के कई कागजात संदिग्ध हैं।
परियोजना प्रभावितों का यह शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन 5 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। आयोजन समस्त आठ गांवों के किसान परिवारों और युवा वर्ग ने संयुक्त रूप से किया है। पोस्टर और स्थानीय संपर्क सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रभावित परिवार अपने दस प्रमुख बिंदुओं पर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
धरने का माहौल तैयार करने वाले किसानों का कहना है कि तलाईपाली परियोजना ने उनकी जमीन तो ली, लेकिन उसके बदले जो पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था होनी थी, वह कई परिवारों तक पहुंची ही नहीं। कुछ परिवारों को रोजगार मिला भी तो प्राथमिकता का ध्यान नहीं रखा गया। जो लोग अपनी जमीन गंवा चुके हैं, उन्हें कंपनी या वीपीआर में प्राथमिकता दिए जाने की मांग लंबे समय से लंबित है।
मांगों की सूची में क्या-क्या शामिल
प्रभावितों ने अपनी प्रमुख मांगें स्पष्ट शब्दों में रखी हैं। इनमें सबसे ऊपर है—पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित परिवारों को रोजगार दिया जाए और पात्र परिवारों का निर्धारण विधि के अनुसार हो। दूसरी मांग है कि वीपीआर और कंपनी में प्रभावितों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, ताकि जिनकी जमीन ली गई है, वे रोजगार से वंचित न रहें।
तेन्दूपत्ता कार्डधारियों को उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग है। प्रभावितों का तर्क है कि अन्य NTPC परियोजनाओं में दिए गए लाभ और आदेश के आधार पर तलाईपाली के पात्र प्रभावितों को भी समान लाभ मिलना चाहिए। भूमि मुआवजे की दर, प्रक्रिया और रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने की मांग भी प्रमुख है। कई परिवारों का आरोप है कि उन्हें वाजतु के अनुसार देय राशि या लाभ नहीं मिला।
ग्राम विकास परामर्श समिति में ली गई सहमति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी सूची में है। प्रभावित किसानों का कहना है कि सहमति की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। इसी क्रम में फर्जी या विवादित सहमति और दस्तावेजों की जांच कर दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की मांग भी रखी गई है।
अन्य महत्वपूर्ण मांगों में सभी पात्र प्रभावित परिवारों को पीएपी कार्ड जारी करना, मुआवजा-अवार्ड-सहमति-पुनर्वास और रोजगार से जुड़े सभी मूल रिकॉर्ड सार्वजनिक करना, पूर्व में दिए गए आवेदनों और ज्ञापनों का निराकरण करना तथा समान परिस्थितियों वाले प्रभावितों के साथ समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। प्रभावितों का स्पष्ट कहना है कि एक ही जिले या परियोजना क्षेत्र में समान परिस्थितियों वाले प्रभावितों को अलग-अलग लाभ देने का आधार स्पष्ट किया जाए।
“जल, जंगल, जमीन, रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास—ये हमारे वैधानिक अधिकार हैं। हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे, लेकिन अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे।”
आयोजकों ने सभी प्रभावित परिवारों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी मांगों को मजबूती से प्रशासन और NTPC प्रबंधन के समक्ष रखें। धरने का स्वरूप पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रखने पर जोर दिया गया है।
स्थानीय स्तर पर बात करने वाले युवाओं का मानना है कि समस्या सिर्फ मुआवजे की नहीं, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और समान व्यवहार की भी है। कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने समय-समय पर ज्ञापन दिए, लेकिन उनका समुचित निराकरण नहीं हुआ। अब वे सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला कर चुके हैं।
NTPC तलाईपाली परियोजना छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित है। परियोजना प्रभावित गांवों में लंबे समय से पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं। कल का धरना इन्हीं लंबित मुद्दों को एक बार फिर प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर उठाने का प्रयास है।
प्रभावित परिवारों का संकल्प साफ है—अधिकार की लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से लड़ी जाएगी, लेकिन अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।
आधार: प्रभावित परिवारों द्वारा जारी पोस्टर और स्थानीय संपर्क सूत्रों से मिली जानकारी। प्रशासन और कंपनी पक्ष से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
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