“अब कागज़ नहीं, सिस्टम बोलेगा: जेन-नेक्स्ट सॉफ्टवेयर से बदलेगी रजिस्ट्री की तस्वीर”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 20 अगस्त 2026।
संपत्ति पंजीयन की जटिल और कागजी प्रक्रिया अब बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्री व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ‘जेन-नेक्स्ट’ सॉफ्टवेयर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इस नई प्रणाली के जरिए दस्तावेजों के भारी-भरकम पुलिंदों से छुटकारा मिलने की उम्मीद है और पूरी प्रक्रिया पेपरलेस हो जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर को विकसित करने की जिम्मेदारी एक प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनी को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को सरल, तेज और त्रुटिरहित बनाना है। अब तक रजिस्ट्री के लिए बिक्री नकल, खसरा, बी-वन, नक्शा और स्टाम्प जैसे कई दस्तावेजों की जरूरत पड़ती थी, जिससे आम नागरिकों को समय और संसाधनों की भारी लागत उठानी पड़ती थी।
एक क्लिक में पूरी गणना
‘जेन-नेक्स्ट’ सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि भूमि का विवरण दर्ज करते ही गाइडलाइन रेट, पंजीयन शुल्क और मुद्रांक शुल्क की स्वतः गणना स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी सीमित होगी। भुगतान की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
कार्यालय सिर्फ औपचारिकता तक सीमित
नई व्यवस्था लागू होने के बाद क्रेता को केवल अंतिम पंजीयन के लिए उप पंजीयक कार्यालय पहुंचना होगा। बाकी सभी दस्तावेज डिजिटल रूप से अपलोड किए जाएंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सरकारी कामकाज में दक्षता भी बढ़ेगी। वर्तमान में कुछ उप पंजीयक कार्यालयों को मॉडल के रूप में विकसित कर इस प्रणाली के परीक्षण की तैयारी की जा रही है।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद विस्तार
सूत्रों के अनुसार, पहले इस सॉफ्टवेयर को चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। यदि यह सफल रहता है तो चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा। शासन स्तर पर इसे तकनीकी रूप से अत्याधुनिक बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिकॉर्ड में छेड़छाड़ पर लगेगी रोक?
हालांकि, पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ एक बड़ी चिंता भी सामने आई है—राजस्व अभिलेखों में हेरफेर। कई मामलों में आरोप लगे हैं कि जमीन के रिकॉर्ड अस्थायी रूप से बदलकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराई गई। विशेष रूप से रायगढ़, धरमजयगढ़ और घरघोड़ा क्षेत्रों में ऐसे प्रकरण चर्चा में रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘जेन-नेक्स्ट’ के साथ राजस्व रिकॉर्ड को भी सुरक्षित और रियल-टाइम अपडेटेड प्रणाली से जोड़ा जाए, तो इस तरह के घोटालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए अलग से निगरानी तंत्र और सॉफ्टवेयर विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
डिजिटल युग में रजिस्ट्री प्रक्रिया का यह बदलाव आम लोगों के लिए राहतभरा साबित हो सकता है, बशर्ते इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। पारदर्शिता और तकनीक का यह संगम तभी सफल माना जाएगा जब यह न केवल सुविधा बढ़ाए, बल्कि वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों पर भी ठोस लगाम लगाए।
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