हाईकोर्ट में जजों की कमी पर राहत के संकेत, कॉलेजियम ने सुझाए तीन नाम

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
बिलासपुर, 19 अगस्त। न्याय की धीमी रफ्तार से जूझ रहे के लिए राहत की एक अहम खबर सामने आई है। लंबे समय से जजों की कमी के कारण बढ़ते लंबित मामलों के बीच अब न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल होती दिख रही है। 18 अगस्त 2026 को हुई की बैठक में तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए सुझाए गए हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
तीन नाम, जिन पर टिकी उम्मीदें
कॉलेजियम ने जिन अधिकारियों के नाम आगे बढ़ाए हैं, उनमें संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार शामिल हैं। ये तीनों न्यायिक सेवा में अनुभव रखते हैं और अब इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अंतिम रूप लेगी। मंजूरी मिलते ही ये अधिकारी हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
आंकड़ों में न्यायिक स्थिति की सच्चाई
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 22 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज 13 जज ही कार्यरत हैं। यानी लगभग 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं—जो किसी भी न्यायिक संस्थान के लिए गंभीर स्थिति मानी जाती है। यदि प्रस्तावित तीन नियुक्तियां पूरी होती हैं, तो यह संख्या बढ़कर 16 हो जाएगी। हालांकि इसके बाद भी छह पद खाली रहेंगे, जो यह संकेत देते हैं कि न्यायिक मजबूती की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है।
लंबित मामलों पर पड़ेगा सीधा असर
हाईकोर्ट में हजारों की संख्या में लंबित प्रकरण न्याय की राह देख रहे हैं। जजों की कमी के चलते सुनवाई में देरी आम हो गई है। ऐसे में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से न केवल अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि मामलों के निपटारे की गति भी तेज होने की संभावना है। न्यायपालिका से जुड़े जानकार मानते हैं कि यदि इसी तरह चरणबद्ध तरीके से रिक्त पद भरे जाते रहे, तो आने वाले समय में लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कॉलेजियम प्रणाली पर एक नजर
देश में उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों की प्रक्रिया के माध्यम से संचालित होती है। इस प्रणाली में वरिष्ठतम न्यायाधीशों का समूह योग्य उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करता है, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलती है। पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन के लिहाज से इस व्यवस्था को न्यायिक स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
आगे की राह
तीन नामों की सिफारिश निश्चित तौर पर सकारात्मक संकेत है, लेकिन न्यायिक ढांचे को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए अभी और नियुक्तियों की जरूरत बनी हुई है। अदालतों में न्याय की गति सिर्फ फैसलों से नहीं, बल्कि समय पर फैसलों से तय होती है—और इसके लिए पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश होना अनिवार्य है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में यह पहल न्याय व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है, बशर्ते प्रक्रिया जल्द पूरी हो और रिक्त पदों को भरने का सिलसिला जारी रहे।
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