रायगढ़ एयरपोर्ट अधिग्रहण पर बढ़ा विवाद: ‘सिंचित को असिंचित’ बताने से लेकर शामिलाती खातों तक 200 आपत्तियां, 7 अक्टूबर तक अंतिम मौका

Journalist Amardeep Chauhan
amarkhabar.com
रायगढ़। बहुप्रतीक्षित रायगढ़ एयरपोर्ट परियोजना अब जमीन पर उतरने से पहले ही जमीनी विवादों में उलझती नजर आ रही है। चार गांवों—कोंड़ातराई, औरदा, बेलपाली और जकेला—में चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के बीच किसानों की आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अब तक करीब 200 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं और प्रशासन ने 7 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि तय की है।
दरअसल, धारा 11 के प्रकाशन के बाद अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होते ही राजस्व अभिलेखों की खामियां खुलकर सामने आने लगी हैं। सबसे बड़ी समस्या संयुक्त (शामिलाती) खातों की है, जिनका पिछले 12 वर्षों से विभाजन नहीं हो सका। वर्ष 2014 में प्रशासनिक आदेश के तहत इन गांवों में जमीन के क्रय-विक्रय, बंटवारा और डायवर्सन पर रोक लगा दी गई थी। इसका परिणाम यह हुआ कि परिवार तो अलग हो गए, लेकिन जमीन अब भी साझा खातों में दर्ज है। ऐसे में मुआवजे के बंटवारे को लेकर भविष्य में बड़े विवाद की आशंका जताई जा रही है।
सिंचित बनाम असिंचित का विवाद
कई किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में असिंचित दर्शाया गया है, जिससे मुआवजा राशि प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि यह त्रुटि केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक हितों से सीधे जुड़ी है। इस मुद्दे को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
अधिग्रहण का दायरा और लागत
एयरपोर्ट निर्माण के लिए कुल 217.89 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसमें—
औरदा: 26.54 हे.
बेलपाली: 50.83 हे.
जकेला: 86.62 हे.
कोंड़ातराई: 53.90 हे.
इसके लिए कलेक्टर द्वारा लगभग 477 करोड़ रुपये की मांग राज्य शासन के विमानन विभाग से की गई है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी इस परियोजना को प्राथमिकता में रखा है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया तेज हुई है।
अधूरी बंटवारा प्रक्रिया बनी बड़ी बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिग्रहण से पहले खातों का स्पष्ट बंटवारा नहीं हुआ, तो मुआवजा वितरण के समय विवाद और बढ़ेंगे। कई मामलों में नामांतरण और खाता सुधार तक लंबित हैं। ऐसे में कुछ किसान न्यायालय जाने की तैयारी में हैं, जिससे परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
‘बची जमीन’ पर भी उठे सवाल
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा आंशिक अधिग्रहण का है। कई किसानों का कहना है कि उनकी अधिकांश जमीन अधिग्रहण में चली जा रही है और शेष बची छोटी-छोटी जमीनें उपयोग के लायक नहीं रहेंगी। ऐसे किसानों ने पूरी जमीन अधिग्रहित करने की मांग रखी है, ताकि उन्हें समुचित मुआवजा मिल सके। वहीं, कुछ किसान ऐसे भी हैं जो किसी भी स्थिति में जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
14 साल बाद फिर सर्वे, असंतोष बरकरार
गौरतलब है कि इस परियोजना के लिए जमीन का प्रारंभिक चयन वर्ष 2012 में ही कर लिया गया था, लेकिन लंबे अंतराल के बाद अब दोबारा सर्वे किया गया है। इस देरी ने भी ग्रामीणों के बीच अविश्वास को जन्म दिया है, क्योंकि जमीन की स्थिति, स्वामित्व और उपयोग में समय के साथ कई बदलाव आ चुके हैं।
अब निगाहें 7 अक्टूबर पर
फिलहाल सभी की नजरें 7 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब तक किसानों को अपनी आपत्तियां दर्ज करानी हैं। इसके बाद एसडीएम स्तर पर सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन राजस्व त्रुटियों को कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ दूर करता है, क्योंकि यही तय करेगा कि रायगढ़ का एयरपोर्ट विकास का प्रतीक बनेगा या विवादों में उलझा एक और अधूरा सपना।
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