16 साल पुराने रेट पर जमीन अधिग्रहण का विरोध: ग्रामीणों ने वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से लगाई गुहार, बोले—”आज के भाव में मिले मुआवजा”

Journalist Amardeep chauhan
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SECL के भू-अर्जन से प्रभावित किसानों का फूटा दर्द, मंत्री ने कलेक्टर से की बात, किसानों के हित में निर्णय का दिया भरोसा
रायगढ़।
एसईसीएल द्वारा ग्राम पोरडा, पोरडी एवं कुर्मीभौना में किए जा रहे भू-अर्जन को लेकर प्रभावित किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार को प्रभावित ग्रामीणों और किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मुआवजा दरों में भारी विसंगति का मुद्दा उठाया।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि पर भू-अर्जन की प्रक्रिया वर्ष 2008-09 में शुरू की गई थी और उस समय जमीन का मुआवजा प्रति एकड़ 6 लाख, 8 लाख और 10 लाख रुपये निर्धारित किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग 16 से 17 वर्ष बाद भी एसईसीएल उसी पुराने मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
“16 साल में जमीन के भाव आसमान छू गए, फिर भी पुरानी दर क्यों?”
ग्रामीण किसानों ने मंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि वर्ष 2008 की तुलना में वर्तमान समय में जमीन की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। रायगढ़ क्षेत्र अब तेजी से औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुका है, ऐसे में पुराने रेट पर मुआवजा देना किसानों के साथ अन्याय होगा।
किसानों का कहना है कि यदि वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा नहीं मिला तो प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
वित्त मंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर को लगाया फोन
ज्ञापन सौंपने के दौरान वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुना और उनकी मांग को न्यायोचित बताया। उन्होंने कहा कि रायगढ़ का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।
बताया जा रहा है कि मंत्री ने तत्काल जिला कलेक्टर रायगढ़ से मोबाइल फोन पर चर्चा कर संबंधित भू-अर्जन प्रक्रिया की जानकारी ली और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए।
“सरकार किसानों के साथ खड़ी है”
मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस मामले में न्यायसंगत समाधान निकालने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
मंत्री के आश्वासन के बाद किसानों ने राहत महसूस करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे का सकारात्मक समाधान जल्द निकलेगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग
✔ वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाए।
✔ 16-17 वर्ष पुराने मूल्यांकन को तत्काल पुनरीक्षित किया जाए।
✔ भू-अर्जन से प्रभावित किसानों के हितों की रक्षा की जाए।
✔ औद्योगिक क्षेत्र की वर्तमान भूमि दरों को मुआवजा निर्धारण में शामिल किया जाए।