गोमर्डा अभ्यारण्य गबन: मजदूरों के पसीने की कमाई डकार गए वन अधिकारी, फर्जी सूची बनाकर ₹1.04 करोड़ का खेल; रेंजर गाज की ज़द में

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/सारंगढ़-बिलाईगढ़
विकास और पर्यटन के नाम पर जंगलों में किस कदर का भ्रष्टाचार पनप रहा है, इसका एक सनसनीखेज उदाहरण रायगढ़ से सटे सारंगढ़-बिलाईगढ़ वनमंडल के गोमर्डा वन्यजीव अभ्यारण्य से सामने आया है। वन विभाग के भीतर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने वन्यजीवों के संरक्षण और क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के नाम पर आए सरकारी पैसों में भारी सेंधमारी की है। फर्जीवाड़ा भी ऐसा कि कागजों में दर्ज मजदूरों की संख्या और बैंक को भेजी गई राशि में जमीन-आसमान का अंतर निकला। पूरे ₹1,04,86,465 का गबन उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
गोमर्डा अभ्यारण्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक स्थलों को संवारने के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये का फंड स्वीकृत हुआ था। विशेष रूप से टमटोरा और माड़ोसिल्ली जलप्रपात के आसपास सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई निर्माण कार्य कराए जाने थे। नियमानुसार, इन कार्यों में स्थानीय मजदूरों से काम लिया जाना था और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में NEFT के ज़रिए किया जाना था।
फरवरी 2024 के दौरान हुए इन कार्यों की जब पड़ताल हुई, तो फर्जीवाड़े की पूरी परतें उधड़ गईं। तत्कालीन वनक्षेत्रपाल (रेंजर) सुरेंद्र कुमार अजय पर आरोप है कि उन्होंने डीएफओ द्वारा स्वीकृत श्रमिकों की आधिकारिक सूची और बैंक को भेजी गई भुगतान सूची में भारी अंतर पैदा किया।
• कागजों का खेल: वास्तविक रूप से जितने श्रमिकों ने काम किया था, बैंक को उससे कहीं अधिक लोगों और बढ़ी हुई राशि का भुगतान पत्रक भेजा गया।
• सत्यापन में पोल खुली: डीएफओ कार्यालय द्वारा स्वीकृत प्रमाणकों और बैंक सूची का जब मिलान किया गया, तो ₹1.04 करोड़ से ज्यादा का अंतर पाया गया।
जांच के बाद एक्शन, रेंजर निलंबित
मामले की शिकायत उच्च स्तर पर होने के बाद जब जांच टीम गठित की गई, तो प्राथमिक जांच में ही विभागीय अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट हुआ कि 1 करोड़ 4 लाख 86 हजार 465 रुपये की अतिरिक्त राशि का बिना किसी वैध स्वीकृति के आहरण किया गया था।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन रेंजर सुरेंद्र कुमार अजय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पर्यटन विकास के नाम पर ‘बंदरबांट’
यह पहला मौका नहीं है जब गोमर्डा अभ्यारण्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आई हो। स्थानीय सूत्रों की मानें तो इससे पहले भी माड़ोसिल्ली जलप्रपात और टमटोरा के विकास के लिए जिला मुख्यालय से आवंटित लाखों रुपये घटिया निर्माण कार्य की भेंट चढ़ चुके हैं।
> बड़ा सवाल: जंगलों के भीतर दुर्गम इलाकों में होने वाले निर्माण कार्यों का कोई पारदर्शी सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) नहीं होता। अधिकारी और ठेकेदार मिलकर घटिया निर्माण को प्रमाणित कर देते हैं और भुगतान उठा लिया जाता है।
फिलहाल, रेंजर पर गाज गिरने के बाद यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या इस पूरे सिंडिकेट में केवल एक रेंजर शामिल था या फिर उच्च स्तर पर बैठे अन्य अधिकारियों की मौन सहमति से यह करोड़ों का खेल जारी था? विभाग अब इस गबन की वसूली और अग्रिम विभागीय जांच की तैयारी में जुटा है।
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