रायगढ़ में खैर-तेंदू लकड़ी तस्करी का अंतरराज्यीय सिंडिकेट ध्वस्त, तीन मास्टरमाइंड गिरफ्तार—फर्जी परमिट के सहारे चल रहा था करोड़ों का खेल

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 4 सितंबर।
जिले के वन क्षेत्रों में लंबे समय से जारी खैर और तेंदू प्रजाति की बेशकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई और तस्करी के बड़े नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई में पर्दाफाश किया है। इस संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह और वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम ने पूरे मामले की जानकारी साझा की।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों से अवैध रूप से लकड़ियां कटवाकर उन्हें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर खपाता था। तस्करी के इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को लालच देकर कटाई करवाई जाती थी, जबकि परिवहन और बिक्री का काम संगठित तरीके से बाहर के राज्यों तक संचालित किया जा रहा था।
मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले आरोपी रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया (जामटीकरा) क्षेत्र में एक गोदाम किराये पर लेकर उसे अवैध भंडारण का केंद्र बना रखा था। यहां कटाई के बाद लकड़ियों को लाकर जमा किया जाता और फिर उनके प्रोसेसिंग के बाद ट्रांसपोर्टिंग की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क को मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा था, जबकि परिवहन की जिम्मेदारी भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान संभाल रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए फर्जी ट्रांजिट परमिट (टीपी) का सहारा लिया। वन विभाग की जांच में बरामद दस्तावेजों पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि दस्तावेज जालसाजी कर तैयार किए गए थे। इसी आधार पर मामले को संगठित अपराध की श्रेणी में लेते हुए थाना जूटमिल में धोखाधड़ी सहित भारतीय वन अधिनियम की धाराओं में अपराध दर्ज किया गया।
दरअसल, इस पूरे प्रकरण की नींव पिछले वर्ष 5 मई 2025 को पड़ी थी, जब वन विभाग की टीम ने गढ़उमरिया स्थित गोदाम पर छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध लकड़ी और उपकरण जब्त किए थे। मौके से 42 नग तेंदू लकड़ी (1.731 घन मीटर) ट्रक में लदी मिली थी, वहीं गोदाम के भीतर 146 नग खैर और तेंदू के लट्ठे (6.741 घन मीटर), जलाऊ लकड़ी के 9 चट्टे, कटर मशीन, वजन मशीन, कुल्हाड़ी और अन्य औजार बरामद किए गए थे। उस समय मुख्य आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
हाल ही में वन विभाग द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की। नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका की पुष्टि की और छापेमारी कर तीन आरोपियों—रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान—को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है, जबकि एक अन्य आरोपी भरत कुमार मेश्राम अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित अपराध, दस्तावेजों की जालसाजी और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित करने के संकेत मिले हैं। पुलिस और वन विभाग अब इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन, अन्य सहयोगियों और संभावित संरक्षण देने वालों की भी जांच कर रहे हैं।
इस कार्रवाई को जिले में वन अपराधों के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने न केवल एक सक्रिय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, बल्कि वन संपदा की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती का भी स्पष्ट संदेश दिया है।
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