पोस्ट हटाने के नाम पर उगाही का आरोप: पत्रकार के खिलाफ धमकी और वसूली का केस दर्ज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
सूरत। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बदनाम करने और उन्हें हटाने के एवज में पैसे मांगने के गंभीर आरोप ने सूरत में पत्रकारिता और साइबर आचरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 वर्षीय व्यापारी मीतकुमार गोधानी की शिकायत पर पत्रकार कौशिक पटेल के खिलाफ धमकी, मारपीट की कोशिश और उगाही से जुड़ा मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल की जा रही है।
क्या है पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, 29 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापारी मीतकुमार गोधानी का नाम ‘WinproFX’ नामक संदिग्ध नेटवर्क से जोड़ते हुए कई पोस्ट साझा किए गए। पीड़ित का आरोप है कि इन पोस्टों के कारण उसकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को नुकसान पहुंचा।
आरोप है कि इसके बाद पत्रकार कौशिक पटेल ने सार्वजनिक स्थान—दुखियाना दरबार के पास—व्यापारी को रोककर पोस्ट हटाने के बदले 2.50 लाख रुपये की मांग की। रकम देने से इनकार करने पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और डंडे से हमला करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। भय के चलते व्यापारी द्वारा 50 हजार रुपये देने की बात भी शिकायत में कही गई है।
पीड़ित के मुताबिक, इसके बाद भी शेष 2 लाख रुपये की मांग जारी रही और 4 अगस्त को दोबारा सोशल मीडिया पर उसका नाम और फोटो साझा किए गए। फोन कॉल्स और मैसेज के जरिए आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप है।
आरोपी पत्रकार का पक्ष
मामले में आरोपित पत्रकार कौशिक पटेल ने आरोपों से इन्कार करते हुए अलग दावा पेश किया है। उनका कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर केवल कुछ संदिग्ध कनेक्शनों को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए धमकियां मिलीं।
पटेल के अनुसार, कॉल करने वाले ने पोस्ट हटाने के लिए दबाव बनाया और अकाउंट हैक या डिलीट करने की धमकी दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर किसी व्यक्ति ने 700 डॉलर में उनका सोशल मीडिया अकाउंट हटाने का “काम” लिया होने की बात कही थी। इस संबंध में उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
जांच के दायरे में कई पहलू
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में उगाही, आपराधिक धमकी, मारपीट की कोशिश और आईटी एक्ट से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पोस्ट्स, कॉल डिटेल्स और वित्तीय लेन-देन के साक्ष्यों की जांच अहम मानी जा रही है।
साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि पोस्ट में लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या था और क्या दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई विवाद या लेन-देन जुड़ा हुआ था।
पत्रकारिता और सोशल मीडिया पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया के जरिए सूचना प्रसार और आरोप-प्रत्यारोप आम हो गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना पुष्ट तथ्यों के किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करना और फिर उसे हटाने के लिए दबाव बनाना गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है। वहीं, पत्रकारों का यह भी कहना है कि जांचपरक सवाल उठाना और सार्वजनिक हित में जानकारी साझा करना उनका अधिकार है—बशर्ते वह तथ्य और संतुलन के साथ हो।
फिलहाल, सूरत पुलिस दोनों पक्षों के दावों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।
अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️