आदेश जारी, पालन अधूरा? तमनार-हाटी तबादले पर रायगढ़ शिक्षा विभाग घिरा सवालों में

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के अनुपालन को लेकर रायगढ़ जिला शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला सहायक ग्रेड-02 हरिशंकर बरेठ के तबादले से जुड़ा है, जिनकी नई पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हाटी निर्धारित की गई है, लेकिन अब तक उन्हें कार्यमुक्त किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शासन के आदेश क्रमांक ESTB-102/756/2026/20-3, दिनांक 6 अगस्त 2026 के तहत हरिशंकर बरेठ, जो वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय रायगढ़ में पदस्थ हैं, का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर हाटी स्कूल में किया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि उन्हें “तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से” नवीन पदस्थापना स्थल पर पदस्थ किया जाता है।
इसके बावजूद विभागीय सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि संबंधित कर्मचारी अब भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही कार्यरत हैं। यदि यह तथ्य सही है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया?
प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को मूल पदस्थापना से कार्यमुक्त कर नवीन स्थान पर कार्यभार ग्रहण कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि किसी कारणवश आदेश के पालन में विलंब हो रहा है, तो उसके पीछे का वैधानिक आधार सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या शासन के मूल आदेश के बाद कोई संशोधन, स्थगन अथवा निरस्तीकरण आदेश जारी हुआ है? यदि ऐसा कोई आदेश अस्तित्व में है, तो उसे विभाग द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए। अन्यथा, आदेश के अनुपालन में देरी पारदर्शिता और प्रशासनिक अनुशासन दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानांतरण नीति के समान अनुपालन को लेकर भी बहस छेड़ दी है। आमतौर पर देखा जाता है कि शासन के आदेशों का पालन कर्मचारियों को तत्काल करना पड़ता है, लेकिन यदि किसी विशेष मामले में आदेश के बावजूद मूल कार्यालय में ही कार्य जारी रहता है, तो इसके कारणों को सार्वजनिक करना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला स्तर के अधिकारियों को शासन के आदेशों के क्रियान्वयन की जवाबदेही तय करनी होती है। ऐसे में यह जानना भी आवश्यक हो जाता है कि क्या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को किसी स्थानांतरण आदेश के पालन को स्थगित करने अथवा टालने का अधिकार है, और यदि है तो किन परिस्थितियों में।
अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि हरिशंकर बरेठ को हाटी में कार्यभार ग्रहण करने के लिए कब कार्यमुक्त किया गया, यदि नहीं किया गया तो उसके पीछे कौन सा आदेश या प्रशासनिक कारण है, और क्या शासन स्तर पर इस मामले में कोई नई अधिसूचना जारी हुई है।
संकेत साफ: एक साधारण दिखने वाला स्थानांतरण आदेश अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बनता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में विभाग की ओर से दिए जाने वाले जवाब इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
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