जेएसपीएल स्क्रैप चोरी कांड का मास्टरमाइंड शिकंजे में: ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ में पुलिस की बड़ी कामयाबी, 1.20 करोड़ की संपत्ति..

Journalist Amardeep Chauhan
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रायगढ़, 4 सितंबर 2026। औद्योगिक नगरी रायगढ़ में बहुचर्चित जेएसपीएल डम्प यार्ड स्क्रैप चोरी मामले में आखिरकार पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। करीब दस माह से फरार चल रहा कथित सरगना अजीज खान अब पुलिस की गिरफ्त में है। कोतरारोड़ पुलिस ने उसे रायपुर के सिलतरा क्षेत्र से हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। यह कार्रवाई जिले में चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत की गई, जिसे पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
इस प्रकरण की जड़ें पिछले साल 1 नवंबर 2025 को दर्ज उस शिकायत में हैं, जिसमें जिंदल स्टील प्लांट के पतरापाली स्थित डम्प यार्ड से भारी मात्रा में लोहे के वेस्ट मटेरियल (एक्रिशन) के गायब होने की बात सामने आई थी। कंपनी के जनसंपर्क महाप्रबंधक हेमंत वर्मा की रिपोर्ट पर कोतरारोड़ थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चोरी सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था।
जांच के दौरान पुलिस को अहम सफलता तब मिली, जब एनएच-49 के किनारे खड़े दो ट्रेलरों में संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली। मौके पर पहुंची टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों—कुशलराम यादव, शंभू यादव और लक्की कंवर—को गिरफ्तार किया। पूछताछ में इन आरोपियों ने चोरी की वारदात स्वीकार की थी। उनके कब्जे से दो ट्रेलर, तीन मोबाइल फोन और कुल 3.6 टन वेस्ट आयरन बरामद किया गया, जिसकी कुल कीमत 1 करोड़ 20 लाख 36 हजार 600 रुपये आंकी गई।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पूरे गिरोह की कड़ियां खुलती गईं। वाहन चालक कुशलराम यादव ने खुलासा किया कि वारदात के पीछे अजीज खान का हाथ था, जिसने फोन पर संपर्क कर ट्रेलरों को जिंदल के कलमी यार्ड बुलाया और वहां से स्क्रैप उठवाया। पुलिस के अनुसार, अजीज खान चोरी किए गए मटेरियल की खरीद-बिक्री के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और इसी के इशारे पर पूरी वारदात को अंजाम दिया गया।
मुख्य आरोपी की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। आखिरकार 2 सितंबर 2026 को उपनिरीक्षक दीपिका निर्मलकर के नेतृत्व में टीम ने रायपुर के सिलतरा क्षेत्र से अजीज खान को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में इस पूरे मामले को संगठित अपराध के रूप में लेते हुए कार्रवाई की गई। कोतरारोड़ थाना प्रभारी निरीक्षक शील आदित्य सिंह सहित पुलिस टीम की सतत निगरानी और मुखबिर तंत्र की सक्रियता के चलते इस मामले में एक-एक कर आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
फिलहाल पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सदस्यों और स्क्रैप के अवैध नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है। औद्योगिक क्षेत्र में सक्रिय ऐसे गिरोहों पर नकेल कसने के लिए आगे भी “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहने के संकेत दिए गए हैं।
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