5 लाख की डील के बाद आरोप–प्रत्यारोप, रायगढ़ में ब्लैकमेलिंग के आरोपों ने बढ़ाई सियासी-प्रशासनिक गर्मी

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 2 सितंबर 2026। लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम कोडकेल से सामने आए एक जटिल और बहुस्तरीय मामले ने जिले में सनसनी फैला दी है। पहले कथित आपसी सहमति से 5 लाख रुपये में विवाद समाप्त करने का इकरारनामा, फिर उसी रकम के बंटवारे पर विवाद और अब एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप—पूरा घटनाक्रम कई सवाल खड़े कर रहा है। मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय तक पहुंचे परस्पर विरोधी आवेदन ने जांच की दिशा को और पेचीदा बना दिया है।
इकरारनामे से शुरुआत, भरोसे पर सवाल
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कोडकेल निवासी उजागर सिदार और फूलवती यादव के बीच वर्षों पुराने संबंधों को लेकर फरवरी 2026 में एक लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ₹5,00,000 की राशि पर दोनों पक्षों ने भविष्य में एक-दूसरे के निजी जीवन में हस्तक्षेप न करने और किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से दूर रहने पर सहमति जताई थी। हालांकि, इस इकरारनामे की वैधता और परिस्थितियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
‘मैनेजमेंट’ के नाम पर रकम हड़पने का आरोप
समझौते के कुछ ही समय बाद, 22 अप्रैल 2026 को मामले में नया मोड़ आया। फूलवती यादव ने एसपी कार्यालय में आवेदन देकर एक स्थानीय पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत में कहा गया कि तय राशि में से उसे केवल ₹3 लाख ही मिले, जबकि शेष ₹2 लाख “लोकल पत्रकारों और तत्कालीन थाना प्रभारी को मैनेज करने” के नाम पर रोक लिए गए। यह आरोप सामने आते ही कथित ‘सेटलमेंट’ की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
अगस्त में दो दिशाओं से वार—ब्लैकमेल बनाम धोखाधड़ी
3 अगस्त 2026 को एसपी कार्यालय में एक ही दिन दो अलग-अलग आवेदन पहुंचे, जिनमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए—
उजागर सिदार का आरोप: उन्होंने दावा किया कि तय रकम देने के बावजूद अब उनसे और पैसे की मांग की जा रही है। पैसे न देने पर उन्हें झूठे दुष्कर्म मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
फूलवती यादव का पक्ष: दूसरी ओर, फूलवती ने अपने आवेदन में 15 वर्षों तक साथ रहने और संतान होने का हवाला देते हुए उजागर पर धोखे से दूसरी शादी करने का आरोप लगाया और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
जांच के दायरे में कई परतें
इस पूरे मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
यदि फरवरी में विधिवत समझौता हो चुका था, तो कुछ महीनों बाद विवाद फिर क्यों भड़का?
क्या वाकई ‘मैनेजमेंट’ के नाम पर राशि का दुरुपयोग हुआ, या यह आरोप दबाव की रणनीति का हिस्सा है?
क्या आपराधिक धाराओं के उपयोग की धमकी को सौदेबाजी का औजार बनाया जा रहा है?
पुलिस की भूमिका पर निगाहें
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बयानों, दस्तावेजों और कथित इकरारनामे की सत्यता की जांच की जा रही है। साथ ही, जिन पर रकम के दुरुपयोग या ‘मैनेजमेंट’ के आरोप लगे हैं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
निष्कर्ष से पहले कई सवाल बाकी
यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कथित तौर पर मध्यस्थता, प्रभाव और दबाव की परतें भी जुड़ती नजर आ रही हैं। ऐसे में निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच ही इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने ला सकती है।
संकेत स्पष्ट: एक ‘सेटलमेंट’ के नाम पर शुरू हुआ मामला अब कानून, नैतिकता और प्रशासनिक पारदर्शिता—तीनों की परीक्षा बन चुका है। अब देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की इस उलझी कड़ी का सच क्या निकलकर सामने आता है।
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