“16 जून से स्कूल खुलने पर मुहर: ‘शाला प्रवेश उत्सव’ के साथ सत्र की शुरुआत, सरकार ने तय की सख्त रूपरेखा”

Journalist Amardeep chauhan
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भीषण गर्मी के बीच छुट्टी बढ़ाने की अटकलों पर विराम, शिक्षा विभाग ने जनभागीदारी और गुणवत्ता सुधार पर दिया जोर

रायपुर।
छत्तीसगढ़ में ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं और अटकलों पर राज्य सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालय 16 जून 2026 से नियमित रूप से खुलेंगे। इसी दिन से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत ‘शाला प्रवेश उत्सव’ के साथ होगी, जिसमें पहले दिन से ही कक्षाएं संचालित होंगी।
मंत्रालय महानदी भवन से जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस बार प्रवेश उत्सव को औपचारिक कार्यक्रम न मानते हुए एक व्यापक जन-अभियान का रूप दिया जाएगा, जिसमें समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
जनभागीदारी से बनेगा उत्सव का माहौल
शिक्षा विभाग ने गांवों और शहरी क्षेत्रों में मुनादी, रैलियों, बैनर-पोस्टर और जनजागरूकता अभियानों के जरिए माहौल तैयार करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और अभिभावकों को इसमें जोड़ा जाएगा, ताकि विद्यालयों में बच्चों की अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
इसके साथ ही सभी स्कूलों को 15 जून तक साफ-सफाई, मरम्मत और आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का जोर इस बात पर है कि बच्चों को एक सुरक्षित, आकर्षक और शैक्षणिक वातावरण मिले।
ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी पर विशेष फोकस
इस बार प्रवेश उत्सव का एक अहम उद्देश्य उन बच्चों को फिर से मुख्यधारा में लाना है, जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी स्थानीय शिक्षा तंत्र को दी गई है।
कक्षा पहली में आंगनबाड़ी से बच्चों की सूची के आधार पर सीधे प्रवेश दिया जाएगा, जबकि कक्षा छठवीं में प्राथमिक विद्यालयों से उत्तीर्ण छात्रों को बिना बाधा दाखिला मिलेगा। यह प्रक्रिया शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मुफ्त सुविधाएं और सम्मान कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र
प्रवेश उत्सव के दौरान नवप्रवेशी छात्रों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाएगा। साथ ही पात्र विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरित की जाएंगी।
शैक्षणिक उत्कृष्टता दिखाने वाले छात्रों और सहयोगी अभिभावकों को सम्मानित करने की भी योजना है।
बिना अतिरिक्त बजट, स्थानीय संसाधनों से होगा आयोजन
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि इस आयोजन के लिए अलग से बजट जारी नहीं किया जाएगा। जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय सहयोग से ही कार्यक्रम को सफल बनाएं।
शिक्षकों के लिए भी तय हुई जवाबदेही
शिक्षकों की 100% उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें आगामी तीन महीनों का शैक्षणिक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य सरकार का यह फैसला केवल स्कूल खोलने का आदेश नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना प्रभावी क्रियान्वयन हो पाता है और ‘शाला प्रवेश उत्सव’ वास्तव में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन पाता है या नहीं।
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