इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेंद्र प्रधान की वापसी: NDA का जोरदार स्वागत, विपक्ष बोला—“युवाओं के जख्म पर नमक”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
नई दिल्ली, 27 जुलाई।
नीट पेपर लीक विवाद की आंच में केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद पहुँचे तो मानसून सत्र का माहौल असाधारण राजनीतिक संदेशों से भर गया। संसद परिसर में कदम रखते ही सत्तापक्ष के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया—नारे, तालियाँ और पारंपरिक सम्मान के साथ—जबकि विपक्ष ने इसे छात्रों की पीड़ा के बीच “संवेदनहीन उत्सव” करार दिया।
संसद के मकर द्वार पर बिहार के दरभंगा से भाजपा सांसद गोपालजी ठाकुर ने धर्मेंद्र प्रधान को मिथिला की पारंपरिक ‘मैथिल पाग’ पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए। स्वागत का यह दृश्य महज औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक संदेश की तरह उभरा—सत्तापक्ष अपने नेता के साथ मजबूती से खड़ा है।
प्रधान जैसे ही अपनी गाड़ी से उतरे, सांसदों का घेरा उनके साथ संसद भवन तक बना रहा। कैमरों के सामने यह दृश्य सत्तापक्ष की एकजुटता का प्रदर्शन था, जिसमें समर्थन का स्वर स्पष्ट और मुखर था।
वहीं, दूसरी ओर संसद परिसर के भीतर विपक्ष का तेवर उतना ही तीखा दिखाई दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने इस स्वागत को “देश के युवाओं का अपमान” बताया। उनका आरोप था कि जिस मुद्दे ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े किए, उसी के बीच इस तरह का जश्न संवेदनशीलता के विपरीत है।
विपक्ष ने “शिक्षा चोरी” के नारे लगाते हुए परिसर में प्रदर्शन किया और छात्रों पर कथित पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से माफी की मांग भी उठाई। विपक्ष का कहना है कि सरकार को जवाबदेही तय करने के बजाय राजनीतिक संदेश देने की जल्दबाजी है।
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका निर्णय व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देशहित और राजनीतिक शुचिता का विषय है। उन्होंने लिखा कि युवाओं और छात्रों के भविष्य की रक्षा सर्वोपरि है और उसी भावना के तहत उन्होंने पद छोड़ा।
संसद के भीतर और बाहर दिखी ये दो तस्वीरें—एक तरफ समर्थन और सम्मान, दूसरी ओर विरोध और आक्रोश—स्पष्ट संकेत देती हैं कि नीट पेपर लीक का मुद्दा अभी राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या ठोस कदम उठाती है और विपक्ष अपने दबाव को किस दिशा में ले जाता है।
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