फॉरेन में मेडिकल सीट हासिल कर सारंगढ़ की बेटी ने रचा इतिहास, डोमाडीह की सत्यभामा चौहान बनीं नई मिसाल

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
सारंगढ़।
जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना किसी सपने से कम नहीं होता, लेकिन डोमाडीह (पोस्ट–मालदा) की बेटी सत्यभामा चौहान ने इसे हकीकत में बदल दिया है। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बीच पली-बढ़ी सत्यभामा का चयन रूस की प्रतिष्ठित नॉर्दर्न स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम (सत्र 2026-27) के लिए हुआ है। इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को गौरवान्वित किया है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली सत्यभामा की यह सफलता संघर्ष, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम मानी जा रही है। जहां अक्सर बड़े शहरों के छात्रों को बेहतर संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, वहीं एक छोटे गांव से निकलकर विदेशी मेडिकल विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना उनकी मेहनत और आत्मविश्वास की सशक्त मिसाल बनकर उभरा है।
परिजनों के मुताबिक, सत्यभामा ने प्रारंभ से ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखी और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास करती रहीं। उनकी इस उपलब्धि पर पिता मोहत्साय चौहान और माता पुष्पा चौहान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि “बेटी ने पूरे परिवार और समाज का सम्मान बढ़ाया है।”
सत्यभामा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद के साथ-साथ अपने मित्रों , बड़ी बहन दीपा राजहंस, माँ संतोष चौहान तथा परिवार के अन्य सदस्यों—दादा, नानी-नाना और मामा-मामी—के सहयोग को दिया है। उनका कहना है कि पारिवारिक समर्थन ने ही उन्हें कठिन समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस खबर के सामने आते ही डोमाडीह सहित आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और समाजजनों का घर पहुंचकर बधाई देने का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सत्यभामा की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी, खासकर उन बेटियों के लिए जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियां ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि उचित मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध हों, तो छोटे गांवों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाएं उभर सकती हैं।
सत्यभामा अब विदेश में चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर भविष्य में एक सफल चिकित्सक बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वह अपनी शिक्षा पूरी कर समाज और देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
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