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छत्तीसगढ़ में अब एफआईआर से चार्जशीट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, हर थाने में ई-साक्ष्य अनिवार्य

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायपुर। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के साथ ही छत्तीसगढ़ में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल ट्रैक पर लाने की दिशा में निर्णायक पहल की गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब अपराध दर्ज होने से लेकर चार्जशीट अदालत तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होगी, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि मामलों के निपटारे में लगने वाला समय भी घटेगा।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी थानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हुए नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और ई-साक्ष्य प्रणाली का अनिवार्य रूप से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर देरी या त्रुटि की गुंजाइश न बचे और डिजिटल रिकॉर्डिंग के माध्यम से केस डायरी अधिक मजबूत और विश्वसनीय बने।

23 भाषाओं में उपलब्ध होगी एफआईआर की प्रति

डिजिटल सुधारों के तहत आम नागरिकों को भी बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब एफआईआर की कॉपी 23 भाषाओं में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। यह कदम न्याय तक पहुंच को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ई-समन और ऑनलाइन चार्जशीट पर फोकस

सरकार की प्राथमिकता जांच और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है। इसी कड़ी में ई-समन जारी करने और उसकी तामील की डिजिटल निगरानी पर जोर दिया गया है। साथ ही, निर्धारित समयसीमा के भीतर ऑनलाइन चार्जशीट सीधे अदालत में प्रस्तुत करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे फाइलों के भौतिक आदान-प्रदान में होने वाली देरी खत्म होगी और केस की प्रगति रियल-टाइम में ट्रैक की जा सकेगी।

बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (NCLI) डैशबोर्ड के विभिन्न मानकों की समीक्षा भी की गई। जुलाई माह के बाद राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग में आए सुधार पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को मैदानी स्तर पर तकनीकी दक्षता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग

NCLI डैशबोर्ड के माध्यम से देशभर में लागू तीनों नए कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के क्रियान्वयन की निगरानी की जा रही है। अब पुलिस विवेचना में डिजिटल साक्ष्य, ई-साक्ष्य और फिंगरप्रिंट पहचान को सीधे केस डायरी से जोड़ा जा रहा है, जिससे जांच की गुणवत्ता और प्रमाणिकता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

बैठक में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के महानिदेशक अमित गर्ग, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) के महानिदेशक आलोक मित्तल, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


विश्लेषण:
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न्याय प्रणाली को “पेपरलेस और टाइम-बाउंड” बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक थानों के स्तर पर तकनीकी ढांचे, इंटरनेट कनेक्टिविटी और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर निर्भर करेगी। यदि इन पहलुओं को मजबूत किया गया, तो छत्तीसगढ़ देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां डिजिटल न्याय व्यवस्था का मॉडल प्रभावी रूप से लागू है।

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Amar Chouhan

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