“सत्य ही सबसे बड़ी खबर: रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका ने पत्रकारिता को दी विश्वसनीयता की नई दिशा”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास और ‘मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र’ का लोकार्पण, जिम्मेदार पत्रकारिता पर दिया जोर
रायपुर, 7 सितम्बर 2026।
तेजी से बदलते डिजिटल दौर और सूचना विस्फोट के बीच पत्रकारिता की मूल आत्मा—सत्य, तथ्य और जनहित—को फिर से केंद्र में रखने का आह्वान करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि खबरों की दुनिया में सबसे बड़ी प्राथमिकता ‘सही सूचना’ होनी चाहिए, न कि ‘सबसे पहले सूचना’।
वे राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया और ‘मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र’ का लोकार्पण भी किया।
महिला शिक्षा और सुरक्षित माहौल पर विशेष जोर
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक नाम नहीं, बल्कि महिला शिक्षा और सामाजिक बदलाव की प्रतीक हैं। उनके नाम पर बने इस छात्रावास से दूर-दराज़ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलेगा, जो उनकी उच्च शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का आकलन महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण से ही किया जाता है, और ऐसे प्रयास उसी दिशा में मजबूत कदम हैं।
एआई के दौर में ‘जिम्मेदारी’ सबसे बड़ी कसौटी
कार्यक्रम में स्थापित ‘मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र’ को भविष्य की पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल डेका ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने मीडिया की कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे तकनीक को केवल सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें। “तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उसके दुरुपयोग की आशंका भी उतनी ही बढ़ेगी—इसलिए पत्रकारों को और अधिक सजग रहना होगा,” उन्होंने कहा।
खबर से पहले पुष्टि, यही पत्रकारिता की असली पहचान
राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति या घटना से जुड़ी खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी पुष्टि अनिवार्य है। एक गलत खबर न केवल व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास भी पैदा कर सकती है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी विश्वसनीयता ही इसकी असली ताकत है।
सोशल मीडिया के दौर में ‘फैक्ट-चेक’ की जरूरत
आज के समय में सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती सूचनाओं को लेकर राज्यपाल ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर वायरल सूचना सच नहीं होती, इसलिए पत्रकारों का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही उसे सार्वजनिक करें।
“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है,” उन्होंने कहा, “एक अच्छा पत्रकार वही है जो सटीक और प्रमाणिक खबर देता है, भले ही वह सबसे पहले न हो।”
अनसुने नायकों को मुख्यधारा में लाने का आह्वान
राज्यपाल डेका ने पत्रकारों से समाज के उन लोगों की कहानियां सामने लाने का आग्रह किया, जो चुपचाप समाज में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, लेकिन सुर्खियों से दूर हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी सकारात्मक और प्रेरक कहानियां समाज में नई ऊर्जा और दिशा देती हैं, और यही पत्रकारिता की वास्तविक भूमिका है।
शिक्षा की गुणवत्ता और विस्तार पर फोकस
विश्वविद्यालय प्रशासन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और कम से कम एक हजार छात्रों का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही। साथ ही उन्होंने पाठ्यक्रमों की मान्यता और शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मंडावी ने किया, जबकि कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रायपुर से उठी यह आवाज केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मीडिया जगत के लिए एक संदेश है—खबर की दौड़ में सत्य पीछे नहीं छूटना चाहिए। पत्रकारिता की साख उसी दिन मजबूत होगी, जब हर खबर से पहले तथ्य और जनहित को तरजीह दी जाएगी।
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