चार माह में संगठित गिरोह पर शिकंजा, घरघोड़ा पुलिस की विवेचना से पांच आरोपियों को मिली सजा

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा (रायगढ़)। संगठित अपराधों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बीच घरघोड़ा पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। मोबाइल दुकान में चोरी और उसके बाद बैंक में सेंधमारी की साजिश रचने वाले पांच आरोपियों को महज चार माह के भीतर न्यायालय से सजा दिलाने में पुलिस की प्रभावी विवेचना और मजबूत साक्ष्य संकलन निर्णायक साबित हुआ है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी घरघोड़ा, श्री दामोदर प्रसाद चंद्रा के न्यायालय ने 8 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में सभी पांचों आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं प्रत्येक को 100-100 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। मामले में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री सत्यनारायण प्रकाश महिलाने द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।
मोबाइल दुकान चोरी से शुरू हुई संगठित अपराध की कड़ी
घटना की शुरुआत 17 फरवरी 2026 की रात कुडुमकेला स्थित साव कंप्यूटर एंड मोबाइल दुकान में हुई चोरी से हुई थी। दुकान संचालक भोजपाल साव की रिपोर्ट पर दर्ज मामले में अज्ञात आरोपियों ने ताला तोड़कर 43 नए मोबाइल, 40 पुराने मोबाइल, ब्लूटुथ स्पीकर-हेडफोन, दस्तावेज और नकदी सहित बड़ी मात्रा में सामान चोरी कर लिया था। इस पर थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 52/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह घटना केवल एक साधारण चोरी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया था।
चोरी के बाद बैंक में सेंधमारी की साजिश
पुलिस विवेचना में यह भी सामने आया कि चोरी के बाद आरोपियों ने अपने इरादे और भी गंभीर बना लिए थे। 15 मार्च 2026 की रात खम्हार स्थित ग्रामीण बैंक में चोरी का प्रयास किया गया, हालांकि वे सफल नहीं हो सके। इस दौरान आरोपियों ने बैंक के सीसीटीवी कैमरे भी उखाड़ लिए।
इसके अगले ही दिन, 16 मार्च की रात पटेलपाली स्थित पंजाब नेशनल बैंक में भी चोरी का प्रयास किया गया, जहां पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी बैंक के वॉल्ट तक नहीं पहुंच सके और वहां से भी सीसीटीवी सिस्टम लेकर फरार हो गए।
थाना प्रभारी के नेतृत्व में वैज्ञानिक विवेचना
पूरे मामले की विवेचना थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक द्वारा की गई। पुलिस टीम ने घटना स्थल, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों की गतिविधियों, चोरी की संपत्ति की बरामदगी और वाहन उपयोग जैसे सभी पहलुओं को वैज्ञानिक तरीके से संकलित किया।
विवेचना के दौरान गवाहों के बयान समयबद्ध रूप से दर्ज किए गए और सभी साक्ष्यों को व्यवस्थित कर 23 मई 2026 को न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की गई। इसके बाद मामले की सुनवाई तेज गति से आगे बढ़ी और मात्र चार माह के भीतर न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया।
26 लाख से अधिक की संपत्ति बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से मारुति सियाज और महिंद्रा XUV-500 सहित चोरी के 60 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया। बरामद संपत्ति की कुल कीमत लगभग 26 लाख 47 हजार रुपये आंकी गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से अपराध को अंजाम दिया था, जिसके चलते प्रकरण में संगठित अपराध से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।
समयबद्ध चार्जशीट और मजबूत पैरवी बनी सजा की वजह
पुलिस की ओर से समय पर चार्जशीट दाखिल करना, ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी इस पूरे मामले में निर्णायक रही। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
इस प्रकरण को नवीन आपराधिक कानून व्यवस्था के तहत समयबद्ध विवेचना और त्वरित न्याय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
सजा पाने वाले आरोपी
इस मामले में मोह. अरसलान, करण महंत, अलतमस खान, जॉनसन बेक और कवलेश यादव को दोषसिद्ध किया गया है।
पुलिस प्रशासन की भूमिका
एसएसपी शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के पर्यवेक्षण में की गई इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई संगठित अपराधों के खिलाफ पुलिस की सख्ती और पेशेवर विवेचना क्षमता को दर्शाती है।
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