साइकिल योजना पर सियासी संग्राम: गुणवत्ता के सवाल पर धरने में बैठे रवि भगत गिरफ्तार, लैलूंगा में बढ़ा तनाव

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
लैलूंगा, रायगढ़।
छात्राओं को वितरित की जा रही सरस्वती साइकिल योजना अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर विरोध दर्ज कराने पहुंचे भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सियासी पारा चढ़ गया है और प्रशासन बनाम विपक्ष की बयानबाज़ी तेज हो गई है।
मामला उस समय गरमाया जब रवि भगत अपने समर्थकों के साथ स्कूल परिसर पहुंचे और छात्राओं को दी जा रही साइकिलों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि वितरित की जा रही साइकिलें मानक के अनुरूप नहीं हैं और उनमें कई तकनीकी खामियां हैं, जो छात्राओं की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं। उन्होंने मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाकर जांच कराने की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर रवि भगत स्कूल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया। प्रशासन ने इसे सरकारी कार्य में व्यवधान मानते हुए पुलिस बल को हस्तक्षेप के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बनने पर उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया और बाद में औपचारिक गिरफ्तारी की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्कूल परिसर में चल रहे सरकारी कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न होने के कारण यह कार्रवाई आवश्यक थी। उनके मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
वहीं, रवि भगत और उनके समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि छात्राओं के हित में उठाए गए मुद्दे को दबाने के लिए बलपूर्वक कार्रवाई की गई। विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर प्रशासन पर निशाना साधते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।
घटना के बाद लैलूंगा और आसपास के इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है, वहीं प्रशासन इस पूरे मामले को कानून-व्यवस्था के नजरिए से देख रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्राओं को वाकई गुणवत्तापूर्ण साइकिल मिल रही हैं, और यदि नहीं, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? साथ ही, यह भी बहस का विषय बन गया है कि जनहित के मुद्दे पर विरोध जताने की सीमा क्या होनी चाहिए और प्रशासनिक कार्रवाई की रेखा कहां तक उचित मानी जाएगी।
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