मुआवजा दिलाने के नाम पर ‘गारंटी चेक’ की मांग, कलेक्टोरेट का बाबू एसीबी के जाल में फंसा

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए ‘रास्ता’ निकालने की पुरानी प्रवृत्ति अब नए-नए रूप लेने लगी है। ताजा मामला रायगढ़ कलेक्टोरेट से सामने आया है, जहां राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ एक बाबू ने सीधे नकद रिश्वत लेने के बजाय ‘गारंटी’ के नाम पर हस्ताक्षरित चेक की मांग कर दी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर ने इस अनोखे तरीके से रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ लिया।
एसीबी के अनुसार, आरोपी बाबू राजकुमार सिदार को मंगलवार 28 जुलाई 2026 को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये का हस्ताक्षरित चेक ले रहा था। जांच एजेंसी का कहना है कि रिश्वत के बदले ‘गारंटी चेक’ लेने का यह तरीका अब तक सामने आए मामलों से अलग है और इसे एक नई प्रवृत्ति के तौर पर देखा जा रहा है।
सर्पदंश से मौत, मुआवजे के लिए भटकते रहे परिजन
मामले की पृष्ठभूमि भी कम संवेदनशील नहीं है। ग्राम बुलाकी, तहसील पुसौर निवासी विजय सिदार की पत्नी रामकुमारी की वर्ष 2023 में सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। शासन की ओर से ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता का प्रावधान है, जिसके तहत पीड़ित परिवार ने आवेदन किया था। लेकिन यह प्रकरण कलेक्टोरेट में लंबे समय से लंबित पड़ा था।
परिजनों का आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने और मुआवजा शीघ्र दिलाने के नाम पर बाबू ने पहले 50 हजार रुपये की मांग की। बाद में उसने कथित तौर पर यह ‘सुविधा’ दी कि फिलहाल नकद राशि नहीं, बल्कि 50 हजार रुपये का हस्ताक्षरित चेक गारंटी के रूप में दे दिया जाए। मुआवजा मिलने के बाद नकद भुगतान करने की शर्त भी रखी गई।
शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल
इस मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने एसीबी बिलासपुर से संपर्क किया। एजेंसी ने प्राथमिक जांच में शिकायत को सही पाया और योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की। तय योजना के अनुसार, जैसे ही आरोपी ने हस्ताक्षरित चेक अपने कब्जे में लिया, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई शुरू, ‘नया तरीका’ चर्चा में
एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले की आगे जांच जारी है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर रिश्वत नकद या अन्य प्रत्यक्ष माध्यमों से ली जाती है, लेकिन इस प्रकरण में ‘गारंटी चेक’ की मांग कर आरोपी ने एक नया रास्ता अपनाने की कोशिश की। हालांकि, कानून की पकड़ से वह बच नहीं सका।
व्यवस्था पर सवाल, संवेदनशील मामलों में भी सौदेबाजी
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपदा और मृत्यु जैसे संवेदनशील मामलों में भी अगर पीड़ित परिवारों को राहत पाने के लिए इस तरह की ‘सौदेबाजी’ का सामना करना पड़े, तो व्यवस्था की जवाबदेही किस हद तक तय की जाएगी। कलेक्टोरेट जैसे अहम कार्यालय में इस तरह की घटना सामने आना प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।
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