“मुआवजे की रकम पर बिचौलियों की ठगी: 49.50 लाख हड़पने का केस दर्ज”
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा/रायगढ़, 18 अगस्त 2026।
खनन परियोजनाओं से जुड़े मुआवजा वितरण में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसील घरघोड़ा के ग्राम तिलाईपाली (बिच्छीनारा) में सामने आए ताजा प्रकरण में एक ग्रामीण की अज्ञानता और भरोसे का कथित तौर पर ऐसा फायदा उठाया गया कि उसके खाते से लाखों रुपये सुनियोजित तरीके से निकाल लिए गए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले के प्रार्थी अमीर कुमार राठिया (35), निवासी ग्राम तिलाईपाली, ने थाने में दिए आवेदन में बताया है कि उनकी जमीन और मकान एनटीपीसी की तिलाईपाली कोयला खनन परियोजना में अधिग्रहित हो चुका है। इसके एवज में उनके खाते में 3 जून 2026 को 69,64,618 रुपये की मुआवजा राशि जमा हुई थी। लेकिन यह राशि उनके लिए राहत बनने के बजाय विवाद और धोखाधड़ी का कारण बन गई।

‘मदद’ के नाम पर शुरू हुआ खेल
प्रार्थी के अनुसार, वह केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़े हैं और बैंकिंग व कागजी प्रक्रियाओं की जानकारी सीमित है। इसी का फायदा उठाते हुए गांव के ही खगेश्वर गुप्ता ने उनसे संपर्क किया और मुआवजा दिलाने में मदद का भरोसा दिया। प्रार्थी ने विश्वास में आकर अपना बैंक पासबुक और संबंधित दस्तावेज उसे सौंप दिए।
आवेदन में उल्लेख है कि 8 जून 2026 को खगेश्वर गुप्ता अपने वाहन से प्रार्थी को लेकर पंजाब नेशनल बैंक, रायकेरा शाखा पहुंचा, जहां पहले से मौजूद प्रदीप गुप्ता के साथ मिलकर बैंकिंग प्रक्रिया कराई गई। प्रार्थी को बताया गया कि उनके बच्चों के नाम खाते में रकम सुरक्षित जमा की जा रही है।
चेक पर हस्ताक्षर, रकम का रास्ता बदला
प्रार्थी का आरोप है कि उनसे खाली चेक पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि राशि परिवार के खातों में स्थानांतरित की जा रही है। लेकिन बाद में बैंक स्टेटमेंट से जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले का रुख बदल दिया।
स्टेटमेंट के अनुसार, उसी दिनांक 8 जून को अलग-अलग चेकों के जरिए रकम का ट्रांसफर किया गया—
– पुत्री अनिता राठिया के खाते में 5 लाख रुपये
– पुत्र विनोद राठिया के खाते में 5 लाख रुपये
– गोपीराम को 1 लाख रुपये (पूर्व उधारी)
– 2 लाख रुपये नगद निकासी
लेकिन इसके साथ ही,
– 25 लाख रुपये प्रदीप गुप्ता के पिता मोतीलाल गुप्ता के खाते में
– 24.50 लाख रुपये खगेश्वर गुप्ता के भाई जगदीश गुप्ता के खाते में ट्रांसफर किए गए
यही वह बिंदु है, जहां से कथित धोखाधड़ी का मामला स्पष्ट होता है। प्रार्थी का कहना है कि इन दोनों बड़ी रकम के ट्रांसफर के लिए उन्होंने कोई सहमति नहीं दी थी।
बैंक स्टेटमेंट से खुला पूरा राज
10 जून को जब प्रार्थी दोबारा बैंक पहुंचे और पासबुक अपडेट कराया, तब उन्हें पूरे लेन-देन की जानकारी मिली। कुल 69.64 लाख की राशि में से 49.50 लाख रुपये ऐसे खातों में ट्रांसफर पाए गए, जिनसे उनका कोई सीधा संबंध नहीं था।
इसके बाद प्रार्थी और उनके परिजनों ने आरोपियों से कई बार संपर्क कर रकम वापस करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। अंततः 17 अगस्त 2026 को उन्होंने लिखित आवेदन देकर थाना घरघोड़ा में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
प्रार्थी के आवेदन पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करते हुए खगेश्वर गुप्ता और प्रदीप गुप्ता, दोनों निवासी तिलाईपाली, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में बैंकिंग प्रक्रिया, चेक जारी होने की परिस्थितियां, और संबंधित खातों की भूमिका को बारीकी से खंगाला जा रहा है। जरूरत पड़ने पर बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
व्यापक संकेत: मुआवजा प्रक्रिया पर सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि उस बड़ी व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है, जिसमें ग्रामीणों की वित्तीय समझ और भरोसे का फायदा उठाकर बिचौलिये सक्रिय हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि
– बैंकिंग जागरूकता की कमी
– दस्तावेजों की सुरक्षा में लापरवाही
– और अनौपचारिक ‘मददगारों’ पर निर्भरता
ऐसे मामलों को जन्म देती है।
तिलाईपाली का यह प्रकरण प्रशासन के लिए चेतावनी है कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए। वहीं ग्रामीणों के बीच वित्तीय साक्षरता बढ़ाना भी समय की मांग है।
फिलहाल निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं—क्या पीड़ित को न्याय मिल पाएगा और क्या आरोपियों तक कानून पूरी सख्ती से पहुंच पाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।
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