नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी ‘कलियुगी मामा’ को कोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत खारिज—गिरफ्तारी पर टिकी सबकी निगाहें

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 19 अगस्त 2026 (केलो प्रवाह)।
रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर देने वाले एक बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी अमित गोयल उर्फ पुष्पेंद्र गोयल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। नाबालिग भांजी के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म के आरोपों से घिरे इस मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। न्यायालय के इस फैसले के बाद अब आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और पुलिस की कार्रवाई पर भी लोगों की नजरें टिक गई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, छाल थाना क्षेत्र में दर्ज इस गंभीर प्रकरण में आरोपी पिछले एक पखवाड़े से फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। ऐसे में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि आरोपी जल्द ही कानून के शिकंजे में होगा।
चार वर्षों तक चलता रहा शोषण, रिश्तों पर लगा दाग
प्रकरण के अनुसार, आरोपी पर अपनी ही नाबालिग रिश्तेदार के साथ पिछले चार वर्षों से दुष्कर्म करने का आरोप है। इस अमानवीय कृत्य ने न केवल एक मासूम की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि समाज में रिश्तों की पवित्रता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला सामने आने के बाद से ही यह चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
हालांकि पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश लगातार जारी है, लेकिन इतने संवेदनशील मामले में लंबे समय तक गिरफ्तारी न होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से जुड़ा है, जिसके चलते कार्रवाई में देरी हो रही है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विदेश भागने की आशंका, बैंक लेनदेन पर नजर
इधर, पीड़ित पक्ष ने आशंका जताई है कि आरोपी देश छोड़कर भागने की फिराक में है। आरोप है कि उसके परिजनों के बैंक खातों से बड़ी मात्रा में रकम निकाली जा रही है। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यदि इसमें सच्चाई पाई जाती है तो यह जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकता है।
एसएसपी की संवेदनशीलता, कार्रवाई की उम्मीद
महिला एवं बाल अपराधों को लेकर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में इस मामले में भी पुलिस से सख्त और त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। आमजन का मानना है कि इस तरह के जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
न्याय की आस में पीड़ित परिवार, समाज की नजरें पुलिस पर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं समाज की नजरें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद यह मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आरोपी कब तक गिरफ्त में आएगा।
बहरहाल, यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था की कसौटी है, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों और रिश्तों की विश्वसनीयता के लिए भी एक कड़ा इम्तिहान बन चुका है।
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