“अब नहीं तो कब?” — राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून पर केंद्र सरकार से निर्णायक कदम की मांग तेज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
ABPSS ने PMO में दोबारा आवेदन कर कहा — केवल रिपोर्ट नहीं, अब कानून चाहिए
नई दिल्ली/मुंबई, 19 अगस्त 2026।
देश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, धमकियों और दमनात्मक घटनाओं के बीच अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने केंद्र सरकार को एक बार फिर कठोर संदेश देते हुए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि अब केवल रिपोर्ट, सिफारिश या आश्वासन पर्याप्त नहीं—बल्कि ठोस कानून बनाना समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।
ABPSS द्वारा पूर्व में प्रधानमंत्री कार्यालय में दायर आवेदन (संख्या: PMOPG/E/2026/0143964, दिनांक 03 अगस्त 2026) के जवाब में भारतीय प्रेस परिषद (PCI) ने 17 अगस्त 2026 को बताया कि वर्ष 2015 में पत्रकार सुरक्षा पर रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है और केंद्र सरकार को कानून बनाने की सिफारिश भी की गई थी।
लेकिन संगठन ने इस जवाब को अधूरा और निराशाजनक बताते हुए कहा कि
“यदि 2015 से ही सिफारिशें मौजूद हैं, तो 10 वर्षों में कानून क्यों नहीं बना?”
इसी गंभीर सवाल के साथ ABPSS ने 18 अगस्त 2026 को अपील (संख्या: MOIAB/E/A/26/0000386) दाखिल की और उसी दिन प्रधानमंत्री कार्यालय में नया आवेदन (Registration No. PMOPG/E/2026/0156778) प्रस्तुत कर सरकार को जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
मूल सवाल — सरकार अब तक क्या कर रही है?
नए आवेदन में ABPSS ने केंद्र सरकार से सीधे-सीधे जवाब मांगा है:
– 2015 की पत्रकार सुरक्षा रिपोर्ट पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
– क्या राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून पर कोई विधेयक, नीति या प्रक्रिया चल रही है?
– यदि नहीं, तो अब तक देरी का कारण क्या है?
संगठन ने यह भी मांग की है कि पत्रकार संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ तत्काल परामर्श शुरू कर एक ठोस कानून का मसौदा तैयार किया जाए।
“पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं” — महफूज़ खान
ABPSS के राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज़ खान ने तीखा बयान देते हुए कहा:
«“पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ हैं। जब वही असुरक्षित होंगे, तो सच सामने कैसे आएगा?
आज देश में पत्रकारों को धमकियां, हमले और दबाव झेलना पड़ रहा है।
ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी अब स्वीकार्य नहीं है।”»
उन्होंने आगे कहा कि यह लड़ाई किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
ABPSS ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी केंद्र सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है, तो संगठन:
– देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाएगा
– पत्रकार प्रतिनिधिमंडल के जरिए दबाव बनाएगा
– शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेगा
– और संवैधानिक दायरे में व्यापक आंदोलन शुरू करेगा
अब फैसले की घड़ी
ABPSS ने अपने वक्तव्य में कहा है कि
👉 “अब केवल यह बताना काफी नहीं कि पहले क्या हुआ था, बल्कि यह बताना जरूरी है कि अब क्या होगा।”
देशभर के पत्रकारों की नजर अब केंद्र सरकार पर है—
क्या सरकार 10 साल पुरानी सिफारिशों को कानून में बदलेगी,
या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
जारीकर्ता:
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS)
महफूज़ खान
राष्ट्रीय संगठन महासचिव
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS)
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