RTI की सख्ती: सूचना रोकी तो नहीं चलेगा बहाना, घरघोड़ा की चार पंचायतों में 15 दिन में हिसाब देने का आदेश

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा।
सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। जनपद पंचायत घरघोड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए विकास कार्यों की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना संबंधित जनसूचना अधिकारी को भारी पड़ गया। प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए जनसूचना अधिकारी सह ग्राम पंचायत सचिव शिव प्रसाद बेहरा को 15 दिनों के भीतर समस्त जानकारी उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
दरअसल, पत्रकार शैलेश शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत चार अलग-अलग प्रकरणों में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया था। निर्धारित समयसीमा में जानकारी न मिलने पर प्रथम अपील दायर की गई। इन अपीलों पर सुनवाई के बाद आदेश क्रमांक 1347, 1348, 1349 एवं 1350 (दिनांक 05 अगस्त 2026) के माध्यम से एक साथ निर्णय पारित किए गए।

किन जानकारियों पर था फोकस
आवेदक ने ग्राम पंचायत टेरम और पूसल्दा में वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की थी। इसमें शामिल थे—
सभी विकास कार्यों की सूची और स्वीकृति विवरण
प्रत्येक निर्माण कार्य की Measurement Book (एम.बी.)
निर्माण सामग्री (सीमेंट, सरिया, गिट्टी, रेत आदि) के जीएसटी बिल
भुगतान वाउचर और व्यय से जुड़े अभिलेख
पंचायत में हुए सभी कार्यों का पूर्ण रिकॉर्ड
“तकनीकी कारण” नहीं चले
सुनवाई के दौरान जनसूचना अधिकारी की ओर से सूचना न देने के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया, लेकिन अपीलीय अधिकारी ने इसे संतोषजनक नहीं माना। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि आवेदक को या तो अभिलेखों का निरीक्षण कराया जाए या प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं—वह भी 15 दिनों के भीतर।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
एक साथ चार अपीलों में इस तरह के आदेश पारित होने के बाद पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि जब एम.बी., बिल और भुगतान रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे, तब यह साफ हो सकेगा कि सरकारी राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ या कहीं गड़बड़ी तो नहीं हुई।
आदेश की अवहेलना पर कड़ी कार्रवाई संभव
यदि निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो आवेदक राज्य सूचना आयोग, रायपुर में द्वितीय अपील दायर कर सकता है। ऐसे मामलों में आयोग संबंधित अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई—यहां तक कि आर्थिक दंड—भी लगा सकता है।
क्षेत्र में चर्चा तेज
चार-चार मामलों में एक साथ आदेश आने के बाद यह मुद्दा अब पूरे घरघोड़ा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजर अब इस पर है कि क्या पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित होगी या मामला आगे बढ़कर सूचना आयोग तक पहुंचेगा।
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