“UPI पर MDR की आहट से मचा हड़कंप: ‘नो UPI, ओनली कैश’ के बोर्डों ने बाजार में भड़काया विरोध, डिजिटल भुगतान बनाम व्यापारियों की जंग तेज”
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com


नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान की रीढ़ माने जाने वाले यूपीआई (UPI) सिस्टम पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से पहले ही देश के कई हिस्सों में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लागू करने के फैसले ने व्यापारियों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। इसका असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है, जहां कई स्थानों पर ‘No UPI, Only Cash’ के बोर्ड तक लगाए जा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में व्यापारी वर्ग ने पहले ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कई शहरों में दुकानदार यूपीआई भुगतान लेने में आनाकानी कर रहे हैं और ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग कर रहे हैं। गाजियाबाद, झांसी और हिसार जैसे शहरों में दुकानों और पेट्रोल पंपों के बाहर नोटिस लगाकर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर रोक या सीमित उपयोग की बात कही जा रही है। हालांकि दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में फिलहाल स्थिति सामान्य बनी हुई है।
इस विरोध को संगठित रूप देने की दिशा में मध्य प्रदेश के व्यापारी संगठनों ने बड़ा कदम उठाया है। इंदौर में हुई बैठक के बाद 23 सितंबर को ‘नो-यूपीआई दिवस’ मनाने का ऐलान किया गया है, जिसमें व्यापारी एक दिन के लिए यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं, मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर रोक लगाने की घोषणा कर दी है।
दिल्ली-एनसीआर में भी इस फैसले के खिलाफ माहौल गर्म होता दिख रहा है। पेट्रोल और सीएनजी पंपों के अलावा कश्मीरी गेट और अन्य थोक बाजारों में ‘नो यूपीआई’ के पोस्टर लगाए गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ उठाना संभव नहीं है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के नेतृत्व में हुए विरोध में यह मांग भी उठी कि सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दे, न कि अतिरिक्त शुल्क लगाए।
पेट्रोलियम डीलर संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका तर्क है कि पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों में पहले से ही सीमित लाभ होता है, ऐसे में MDR लागू होने से उनका मार्जिन और प्रभावित होगा। कई संगठनों ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर क्रेडिट कार्ड की तरह फ्लैट रिफंड या पूरी तरह छूट देने की मांग रखी है।
हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नए फ्रेमवर्क के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी। NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा और शुल्क केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापारियों का यह विरोध तेज होता है, तो यह डिजिटल इंडिया अभियान की गति को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, सरकार और नियामक संस्थाओं के सामने चुनौती यह होगी कि वे डिजिटल भुगतान प्रणाली को बनाए रखते हुए व्यापारियों के हितों का संतुलन कैसे साधते हैं।
फिलहाल, 15 अक्टूबर की तारीख नजदीक आते ही बाजार और नीति के बीच खींचतान तेज होती दिख रही है—जहां एक ओर डिजिटल भुगतान का भविष्य दांव पर है, वहीं दूसरी ओर छोटे व्यापारियों की लागत और लाभ का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण बना हुआ है।
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