तमनार कोल ब्लॉक आंदोलन: लाठीचार्ज, मौत और गिरफ्तारी पर उठा सवाल… राज्यपाल के नाम ज्ञापन,, न्यायिक जांच की मांग तेज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़। तमनार ब्लॉक के लिबरा सीएचपी चौक पर कोयला खदान परियोजनाओं के विरोध में चल रहे लंबे आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। आंदोलन के दौरान कथित लाठीचार्ज, एक बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और इसके बाद ग्रामीणों की गिरफ्तारी को लेकर क्षेत्र में आक्रोश गहराता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि तमनार क्षेत्र पूरी तरह कोयला अधिसूचित जोन में आता है, जहां दिसंबर 2025 में आयोजित जनसुनवाई को लेकर शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। पर्यावरणीय चिंताओं और विस्थापन के मुद्दों को लेकर 14 गांवों के ग्रामीणों ने लिबरा सीएचपी चौक पर शांतिपूर्ण धरना शुरू किया था, जिससे खनन और परिवहन गतिविधियों पर असर पड़ रहा था।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए औद्योगिक हितों के दबाव में प्रशासन ने धरना स्थल से वाहनों की आवाजाही शुरू कराई। इसी दौरान 27 दिसंबर 2025 को एक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद जब ग्रामीणों ने विरोध जताया, तो हालात बिगड़ने पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ज्ञापन के अनुसार, लाठीचार्ज के बाद पुलिस ने आंदोलन से जुड़े 14 ग्रामीणों पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हस्ताक्षरकर्ताओं का दावा है कि कई निर्दोष लोगों को भी प्रकरणों में शामिल कर भय का माहौल बनाया गया है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में असंतोष बढ़ा है।
इस मुद्दे पर लैलूंगा के पूर्व विधायक हृदय राम राठिया, घरघोड़ा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कैलाश कुमार गुप्ता, जनचेतना सहित विभिन्न सामाजिक और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने खुलकर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष न्यायिक जांच नहीं कराई गई, तो न केवल न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे, बल्कि क्षेत्र में शांति बहाली भी कठिन हो जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए गिरफ्तार ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और घटना की न्यायिक जांच के आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन-प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।
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