21 दिन की पड़ताल के बाद खुला दुष्कर्म और दोहरा हत्याकांड, 65 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
महिला और उसकी 10 माह की बच्ची की हत्या का मामला सुलझाने का पुलिस का दावा; जांच में दुष्कर्म की भी सामने आई बात, आरोपी के कपड़े और अन्य साक्ष्य बरामद

रायगढ़/लैलूंगा। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम छापरपानी में 16 जुलाई को सामने आए महिला और उसकी 10 माह की बच्ची की मौत के मामले की गुत्थी पुलिस ने 21 दिन की लगातार जांच के बाद सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में ग्राम कोड़ासिया निवासी 65 वर्षीय भिखारीराम नागवंशी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश और विरोध करने पर उस पर हमला करने तथा बच्ची की हत्या करने की बात स्वीकार की है।
मामला सामने आने के बाद से ही पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि सुनसान इलाके में स्थित खेत के मकान में मां-बेटी तक कौन पहुंचा था। घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे और महिला का किसी के साथ विवाद होने की भी कोई स्पष्ट जानकारी पुलिस को नहीं मिली थी। ऐसे में पुलिस ने घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों के साथ ग्रामीणों से मिली सूचनाओं को जांच का आधार बनाया।
खेत के मकान में मिली थी मां-बेटी
पुलिस के अनुसार, मृतका अपने पति की मृत्यु के बाद ग्राम छापरपानी में प्रहलाद बेहरा के खेत में बने बोर मकान में अपनी 10 माह की बच्ची के साथ रह रही थी। 16 जुलाई की सुबह वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली थी, जबकि बच्ची की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। महिला के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान थे। बाद में उपचार के दौरान महिला ने भी दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी, लैलूंगा पुलिस, एफएसएल और डॉग स्क्वॉड की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर विभिन्न भौतिक साक्ष्य जुटाए गए। मामले में थाना लैलूंगा में अपराध क्रमांक 230/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत विवेचना शुरू की गई।
गांव में कैंप कर पुलिस ने जुटाई जानकारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मामले की लगातार मॉनिटरिंग की। थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ग्राम छापरपानी में कैंप कर ग्रामीणों से पूछताछ की और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
इसी दौरान पुलिस को मुखबिरों से ग्राम कोड़ासिया निवासी भिखारीराम नागवंशी के संबंध में कुछ अहम जानकारी मिली। पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए बुलाया। पुलिस के मुताबिक, उस समय उसके हाथ में चोट का निशान भी दिखाई दिया था। हालांकि पूछताछ के दौरान उसने घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया।
पूछताछ और साक्ष्यों को जोड़ते हुए आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों को आपस में जोड़कर संदिग्ध से दोबारा पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि 15 जुलाई की रात वह प्रहलाद बेहरा के खेत में बने बोर मकान तक पहुंचा था। वहां महिला अपनी बच्ची के साथ सो रही थी। आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। महिला के विरोध करने पर कथित रूप से उसने वहां रखी ईंट से महिला के सिर और चेहरे पर हमला किया। महिला के बेहोश होने के बाद आरोपी द्वारा उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की बात भी पुलिस ने बताई है।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान बच्ची के रोने पर आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की और गला दबाकर तथा ईंट से हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया।
खून के निशान वाली धोती बरामद
पुलिस के मुताबिक, वारदात के समय आरोपी ने जो धोती पहनी थी, उसे बाद में बदलकर छिपा दिया गया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उक्त धोती बरामद की है। पुलिस ने इसे मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। इसके अलावा घटनास्थल से पहले संकलित किए गए भौतिक साक्ष्यों को भी विवेचना का हिस्सा बनाया गया है।
जांच में दुष्कर्म से संबंधित तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और 66 भी जोड़ी है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
21 दिन की जांच में कई पहलुओं पर हुई पड़ताल
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घटना स्थल अपेक्षाकृत सुनसान था और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया था। ऐसे में पुलिस ने केवल किसी एक सुराग पर निर्भर रहने के बजाय घटनास्थल के साक्ष्य, संदिग्धों की गतिविधियों, ग्रामीणों से मिली जानकारी और अन्य जांच बिंदुओं को जोड़कर मामले की दिशा तय की।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि संवेदनशील अपराधों की जांच में धैर्य, वैज्ञानिक विवेचना, लगातार निगरानी और टीमवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
मामले के खुलासे में एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और डीएसपी सुशांतो बनर्जी के मार्गदर्शन में लैलूंगा थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव, प्रशिक्षु उप निरीक्षक प्रीतम बघेल, प्रधान आरक्षक नंद कुमार पैंकरा, आरक्षक चमार साय और विनोद कुजूर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के बाद अब प्रकरण की आगामी न्यायिक प्रक्रिया साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर आगे बढ़ेगी।
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