तमनार नगर पंचायत में आरक्षण की प्रक्रिया शुरू, 15 वार्डों का बदलेगा सियासी गणित

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए नगरीय प्रशासन संचालक अधिकृत, वार्डों के आरक्षण की जिम्मेदारी कलेक्टर को; हाईकोर्ट में लंबित है पूर्व मनोनीत समिति का मामला
रायगढ़/तमनार। लंबे समय से नगर पंचायत का दर्जा मिलने की प्रतीक्षा कर रहे तमनार में अब नगरीय निकाय के गठन की प्रक्रिया एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। राज्य शासन ने तमनार नगर पंचायत के अध्यक्ष पद और वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में यह तय होगा कि नगर पंचायत का अध्यक्ष पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा और 15 वार्डों में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनारक्षित तथा महिला वर्ग के लिए सीटों का बंटवारा किस तरह होगा।
शासन के जारी आदेश के अनुसार अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक रिमिजियुस एक्का को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं तमनार नगर पंचायत के 15 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी रायगढ़ कलेक्टर को सौंपी गई है।
तमनार और बासनपाली को मिलाकर बना है नया नगर पंचायत
तमनार नगर पंचायत के गठन में ग्राम पंचायत तमनार और बासनपाली को शामिल किया गया है। नगर पंचायत के रूप में अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले अध्यक्ष पद और वार्डों का आरक्षण किया जा रहा है।
15 वार्डों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर पंचायत के राजनीतिक समीकरण भी काफी हद तक स्पष्ट हो जाएंगे। खासतौर पर अध्यक्ष पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होता है, इस पर स्थानीय राजनीति और संभावित दावेदारों की दिशा निर्भर करेगी।
पहले मनोनीत की गई थी समिति, हाईकोर्ट में मामला लंबित
नगर पंचायत की घोषणा के बाद राज्य शासन ने 16 फरवरी को एक समिति का गठन करते हुए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का मनोनयन किया था। उस समय अश्वनी पटनायक को अध्यक्ष तथा सुरेंद्र साहू को उपाध्यक्ष बनाया गया था। समिति में जगन्नाथ सिदार, सुखीलाल सिदार, गीतांजलि पटनायक, सुखदेव नायक, हेमलाल साहू, अमृतलाल साहू, योगेश गुप्ता, ज्योति पटेल और जीवन पटेल को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
हालांकि इस मनोनयन के बाद मामला न्यायालय पहुंच गया। ग्राम पंचायत तमनार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नगर पंचायत गठन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई। याचिका में यह तर्क रखा गया कि तमनार क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है और ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगर पंचायत गठित करने की प्रक्रिया को लेकर निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मनोनीत समिति के कामकाज पर रोक लगा दी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह न्यायिक स्थिति अभी भी प्रभावी है।
आरक्षण प्रक्रिया से खुलेगा अगला रास्ता
अब शासन की ओर से अध्यक्ष और वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद तमनार नगर पंचायत के गठन की प्रशासनिक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि आरक्षण प्रक्रिया के साथ-साथ पूर्व में गठित समिति को लेकर चल रहा न्यायिक मामला भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
प्रशासन के सामने एक ओर आरक्षण की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत गठन एवं पूर्व मनोनीत समिति से संबंधित न्यायिक स्थिति का भी पालन करना होगा।
15 वार्डों पर रहेगी स्थानीय राजनीति की नजर
तमनार में नगर पंचायत बनने के बाद पहली बार वार्डों का औपचारिक आरक्षण स्थानीय राजनीति के लिए बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। कौन-सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसका असर आगामी नगरीय चुनाव की संभावित तैयारियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।
फिलहाल स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा नजर अध्यक्ष पद के आरक्षण पर है। अध्यक्ष पद यदि किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित होता है तो उसी के अनुरूप राजनीतिक दलों और स्थानीय दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। वहीं 15 वार्डों के आरक्षण के बाद संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर भी काफी हद तक सामने आ जाएगी।
तमनार को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद अब आरक्षण की प्रक्रिया ने स्थानीय निकाय गठन को अगले चरण में पहुंचा दिया है। हालांकि अंतिम तस्वीर आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने और न्यायालय में लंबित मामले की स्थिति के आधार पर ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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