साइलो सप्लाई के नाम पर करोड़ों की ठगी: इथेनॉल प्रोजेक्ट को झटका, सप्लायर पर FIR दर्ज

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 23 जून।
औद्योगिक विस्तार की रफ्तार पकड़ते रायगढ़ में एक बार फिर कारोबारी भरोसे को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। इथेनॉल उत्पादन इकाई स्थापित कर रही एक निजी कंपनी के साथ ग्रेन स्टोरेज साइलो की आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का खुलासा हुआ है। शिकायत के बाद पुलिस ने सप्लायर कंपनी के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला पूंजीपथरा थाना क्षेत्र का है, जहां नवदुर्गा फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि साइलो सप्लाई के लिए किया गया करोड़ों का सौदा धोखाधड़ी में बदल गया। कंपनी के प्रबंधक राकेश प्रकाश पाण्डेय के अनुसार, वर्ष 2024 में 100 केएलपीडी क्षमता वाले ग्रेन-बेस्ड इथेनॉल प्लांट की स्थापना के लिए 75 हजार मीट्रिक टन क्षमता के साइलो की आवश्यकता थी।
इसी जरूरत को पूरा करने के लिए दिल्ली स्थित एक सप्लायर कंपनी से संपर्क किया गया। हरियाणा स्थित कार्यालय के माध्यम से बातचीत के बाद 20 अप्रैल 2024 को करीब 3.50 करोड़ रुपये का क्रय आदेश जारी किया गया। तय शर्तों के अनुसार अलग-अलग चरणों में आरटीजीएस के माध्यम से लगभग 2.17 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
आंशिक सप्लाई, बाकी सिर्फ कागजों में
शिकायत के मुताबिक, भुगतान के बाद कंपनी को केवल लगभग 68.90 लाख रुपये मूल्य का ही सामान प्राप्त हुआ। शेष सामग्री भेजने के नाम पर सप्लायर की ओर से कथित तौर पर फर्जी इनवॉइस और डिस्पैच दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते रहे। आश्वासन दिया गया कि दो महीने के भीतर पूरी सप्लाई कर दी जाएगी, लेकिन समय बीतने के साथ यह भरोसा संदेह में बदल गया।
टालमटोल से खुली परतें
जब लंबे समय तक सामग्री नहीं पहुंची, तो कंपनी के प्रतिनिधि हरियाणा जाकर सप्लायर से सीधे संपर्क में आए। वहां बकाया राशि लौटाने के लिए करीब 1.48 करोड़ रुपये का चेक दिया गया, लेकिन 26 मार्च को बैंक में प्रस्तुत करने पर यह चेक अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गया। यहीं से पूरे प्रकरण में ठगी की आशंका मजबूत हो गई।
कानूनी कार्रवाई शुरू
प्राथमिक जांच में करीब 1.44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पूंजीपथरा पुलिस ने आरोपी संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस का कहना है कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है।
उद्योगिक माहौल पर असर
रायगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक जिले में इस तरह की घटनाएं निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकती हैं। विशेष रूप से इथेनॉल जैसे उभरते सेक्टर में, जहां सरकार भी प्रोत्साहन दे रही है, इस प्रकार की धोखाधड़ी परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती है।
सवाल कई, जवाब जांच के बाद
क्या सप्लायर कंपनी पहले से ही फर्जी इरादे से काम कर रही थी? क्या अन्य कंपनियां भी इस जाल में फंसी हैं? पुलिस जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है। फिलहाल, इस पूरे मामले ने कारोबारी लेन-देन में सतर्कता और सत्यापन की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है।
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