रायगढ़ में राजस्व महकमे की बड़ी सर्जरी, अब नजर नई तैनाती की कार्यशैली पर

Journalist Amardeep chauhan
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रायगढ़।
जिले के राजस्व प्रशासन में बुधवार को हुए व्यापक फेरबदल ने न केवल पदस्थापनाओं का नक्शा बदला है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और सक्रिय बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के बाद घरघोड़ा, खरसिया, तमनार और लैलूंगा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नई जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। आदेश के तत्काल प्रभाव से लागू होते ही महकमे में हलचल तेज हो गई है और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है।
इस फेरबदल के तहत संदीप सिंह राजपूत को खरसिया से स्थानांतरित कर लैलूंगा तहसील की कमान सौंपी गई है। वहीं उज्ज्वल पाण्डेय, जो अब तक लैलूंगा में नायब तहसीलदार एवं प्रभारी तहसीलदार के रूप में कार्यरत थे, उन्हें खरसिया में नायब तहसीलदार के रूप में पदस्थ किया गया है। हालांकि, प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए उन्हें खरसिया तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
इसी क्रम में शिवम पाण्डेय को घरघोड़ा से तमनार भेजा गया है, जबकि मनोज कुमार गुप्ता को घरघोड़ा तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गई है। अन्य तबादलों में श्रीमती वर्षा तिवारी को रायगढ़ से मुकडेगा तथा हिमांशु सिंह को मुकडेगा से घरघोड़ा स्थानांतरित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि श्रीमती मोनल साय 4 जून से 1 सितंबर 2026 तक संतान पालन अवकाश पर रहेंगी, जिसके चलते कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने वित्तीय कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए भी एहतियात बरती है। खरसिया तहसील में नियमित तहसीलदार की नियुक्ति तक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आहरण एवं संवितरण अधिकारी के अधिकार दिए गए हैं, ताकि दैनिक प्रशासनिक और वित्तीय गतिविधियां बिना बाधा जारी रह सकें।
दरअसल, लैलूंगा क्षेत्र लंबे समय से सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व प्रकरणों के लंबित रहने की शिकायतों को लेकर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में वहां नए तहसीलदार की नियुक्ति को महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सुधार की संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि नई तैनाती के बाद फाइलों की गति बढ़ेगी और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आएगी।
जानकारों का मानना है कि यह फेरबदल केवल पद परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की एक रणनीतिक पहल भी है। जिन क्षेत्रों में शिकायतें अधिक रही हैं, वहां अपेक्षाकृत सक्रिय अधिकारियों की तैनाती इस बात का संकेत देती है कि व्यवस्था में कसावट लाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, जनता की निगाहें नए पदस्थ अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल वही पुराना है, लेकिन जवाब अब नई परिस्थितियों में तलाशा जाएगा—क्या ये बदलाव राजस्व व्यवस्था को गति देंगे या फिर फाइलों की रफ्तार पहले जैसी ही बनी रहेगी? आने वाले दिनों में अधिकारियों की कार्यशैली ही इस सवाल का असली जवाब देगी।
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