कल अचानक क्यों थम जाएगा छत्तीसगढ़ का सरकारी कामकाज? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप…

Journalist Amardeep Chauhan
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुधवार, 12 अगस्त को अचानक सरकारी गतिविधियों पर ब्रेक लग जाएगा। वजह है राज्य का पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पर्व—हरेली तिहार। राज्य सरकार ने इस अवसर पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जिसके चलते सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल-कॉलेज और बैंक बंद रहेंगे।
सरकारी आदेश के मुताबिक यह अवकाश केवल शासकीय दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों में भी छुट्टी रहेगी। ऐसे में प्रदेशभर में एक दिन के लिए प्रशासनिक गतिविधियां ठप रहेंगी और ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में हरेली का उत्साह देखने को मिलेगा।
मुख्यमंत्री निवास में भी खास आयोजन
सूत्रों के अनुसार राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भी हरेली तिहार को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी, जो इस पर्व की सांस्कृतिक महत्ता को और भी रेखांकित करेंगी।
क्या है हरेली तिहार?
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा से जुड़ा एक प्रमुख लोकपर्व है, जिसे सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व खेती-किसानी के नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किसान अपने कृषि उपकरण—हल, नांगर, कुदारी, बसुला, टंगिया आदि—को साफ कर उनकी पूजा करते हैं।
इसके साथ ही पशुधन, विशेषकर गाय और बैलों को नहलाकर सजाया जाता है और उन्हें भी पूजा में शामिल किया जाता है। यह परंपरा प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।
परंपराएं और लोक-रंग
हरेली के दिन घर-घर में पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें गुड़ का चीला, गुलगुला और भजिया प्रमुख हैं। इन व्यंजनों का भोग पहले कृषि औजारों और पशुओं को लगाया जाता है, फिर परिवार द्वारा ग्रहण किया जाता है।
इस दिन बच्चों और युवाओं के बीच गेड़ी खेलने की परंपरा खास आकर्षण होती है। बांस से बनी गेड़ी पर चलना और दौड़ प्रतियोगिताएं ग्रामीण इलाकों में उत्सव का रंग और गहरा कर देती हैं। वहीं कई स्थानों पर नारियल फेंक प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
नीम की टहनी और आस्था
हरेली के अवसर पर घरों और खेतों में नीम की टहनी टांगने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों और बीमारियों से बचाव होता है। किसान इस दिन खेतों में जाकर पूजा-पाठ करते हैं और अच्छी फसल, कीटों से सुरक्षा तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
एक दिन की छुट्टी, परंपराओं का उत्सव
हरेली तिहार केवल अवकाश भर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, कृषि जीवन और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन पूरा प्रदेश आधुनिक भागदौड़ से अलग होकर अपनी जड़ों से जुड़ता नजर आता है।
कल जब सरकारी दफ्तरों के दरवाजे बंद होंगे, तब गांव-गांव और शहरों में परंपरा, आस्था और उत्सव का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
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