छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापना पर सख्ती: अब लाल श्रेणी के प्रोजेक्ट आबादी व जंगल से 500 मीटर दूर ही होंगे

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर/रायगढ़।
राज्य में बढ़ते औद्योगिकीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को संतुलित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने “उद्योग स्थल चयन नियम” के तहत नए और अधिक सख्त मानदंड जारी किए हैं, जिनका सीधा असर आने वाले समय में उद्योगों की लोकेशन और स्वीकृति प्रक्रिया पर पड़ेगा।
नए प्रावधानों के मुताबिक अब लाल श्रेणी के भारी और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग—जैसे थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट संयंत्र, आयरन एंड स्टील यूनिट और केमिकल उद्योग—को आरक्षित वन, रिहायशी इलाकों, स्कूलों और हेरिटेज स्थलों से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर ही स्थापित किया जा सकेगा। यह निर्णय उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां औद्योगिक विस्तार और आबादी के बीच टकराव की स्थिति बन रही थी।
विचाराधीन प्रस्ताव भी दायरे में
पर्यावरण मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल नए आवेदनों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थापना हेतु सहमति (CTE) और संचालन हेतु सहमति (CTO) के लिए पहले से लंबित सभी प्रस्तावों को भी अब इन्हीं संशोधित मानकों के आधार पर परखा जाएगा। इससे कई परियोजनाओं की पुनः समीक्षा तय मानी जा रही है।
प्रदूषण स्तर के आधार पर तय दूरी
नए दिशा-निर्देशों में उद्योगों को तीन श्रेणियों—लाल, नारंगी और हरी—में बांटते हुए न्यूनतम दूरी निर्धारित की गई है:
लाल श्रेणी: 500 मीटर
नारंगी श्रेणी: 200 मीटर
हरी श्रेणी: 100 मीटर
नारंगी श्रेणी में मध्यम प्रदूषण वाले उद्योग जैसे राइस मिल, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और छोटे इंजीनियरिंग प्लांट शामिल हैं, जबकि हरी श्रेणी में कम या नगण्य प्रदूषण वाले छोटे उद्योगों को रखा गया है।
औद्योगिक जिलों पर सीधा असर
रायगढ़, कोरबा, रायपुर (सिलतरा-उरला) और दुर्ग-भिलाई जैसे औद्योगिक बेल्ट में इस निर्णय का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। यहां पहले से संचालित और प्रस्तावित कई परियोजनाओं को अब नई दूरी की शर्तों के अनुरूप अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लंबे समय से उठ रही उन चिंताओं का जवाब है, जिनमें उद्योगों के कारण बढ़ते प्रदूषण, जल स्रोतों पर दबाव और आबादी के बीच स्वास्थ्य जोखिम को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नए नियमों से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि, उद्योग जगत के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि सख्त दूरी मानदंडों से परियोजनाओं की लागत और भूमि चयन की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में विकास बनाम पर्यावरण की बहस और तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
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