कोयला खनन परियोजना में अवैध पोल्ट्री फार्म और गोदाम बनाने वाले.. कोयला खदान खुलवाने का निर्णय…!!

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़ (रायगढ़)। प्रस्तावित दुर्गापुर–शाहपुर ओपन कोल परियोजना को लेकर क्षेत्र में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2016 में द्वारा लगभग 1677 हेक्टेयर भूमि को खनन के लिए चिन्हित किए जाने के बाद से (SECL) की पहल और ग्रामीणों के विरोध के बीच खींचतान लगातार जारी है। ताजा घटनाक्रम ने इस विवाद को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां अब सहमति की प्रक्रिया और कथित अवैध निर्माण दोनों सवालों के घेरे में हैं।
मुनादी से लेकर मोबाइल कॉल तक: सहमति प्रक्रिया पर सवाल
बीते दिनों ग्राम पंचायत शाहपुर में तत्कालीन एसडीएम दिगेश पटेल की मौजूदगी में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और परियोजना का खुलकर विरोध किया। बैठक की सूचना मुनादी के जरिए दी गई थी, जिससे प्रभावित गांवों के लोग व्यापक रूप से शामिल हो सके।
इसके उलट, अंबेटिकरा और हाल ही में 11 अगस्त को जनपद पंचायत धरमजयगढ़ में आयोजित बैठक को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इन बैठकों की सूचना सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई, बल्कि फोन के माध्यम से चुनिंदा लोगों को बुलाया गया। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘समर्थन दिखाने की कोशिश’ का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कुछ बैठकों में ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें परियोजना समर्थक बताया गया और बाद में मीडिया में इसे आम सहमति के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल अविश्वास बढ़ा है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की निष्पक्षता भी कठघरे में आ गई है।
अवैध पोल्ट्री फार्म और गोदाम बने विवाद का नया केंद्र
विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू उन किसानों और व्यक्तियों को लेकर है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अधिक मुआवजा पाने के उद्देश्य से अपनी जमीनों पर पोल्ट्री फार्म और गोदाम जैसे निर्माण कर लिए हैं। ग्रामीणों ने इन निर्माणों की वैधता की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो मुआवजा वितरण में भारी असमानता और भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहेगी।
ड्रोन सर्वे पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि SECL द्वारा हाल ही में कराया गया ड्रोन सर्वे उनकी सहमति के बिना किया गया, जिसे उन्होंने जबरन कार्रवाई करार दिया है। इस मामले में पुलिस थाना धरमजयगढ़ में शिकायत दर्ज कराने की बात भी सामने आई है।
खुली बैठक की मांग पर अड़े ग्रामीण
शाहपुर कॉलोनी स्थित कीर्तन मैदान में आयोजित खुली बैठक में विभिन्न गांवों के किसानों ने एक स्वर में भूमि न देने का निर्णय दोहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वास्तव में उनकी राय जाननी है, तो बैठकों का आयोजन गांवों में, मुनादी और सार्वजनिक सूचना के साथ खुले मंच पर किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का तर्क है कि बंद कमरे में सीमित लोगों के साथ होने वाली चर्चाएं न तो विश्वास पैदा करती हैं और न ही किसी लोकतांत्रिक समाधान का रास्ता खोलती हैं।
आगामी कलेक्टर बैठक पर टिकी निगाहें
सूत्रों के मुताबिक, अगले दो-तीन दिनों में जिला कलेक्टर की मौजूदगी में एक अहम बैठक प्रस्तावित है। अब यह बैठक तय करेगी कि प्रशासन और SECL पारदर्शी जनसुनवाई की दिशा में कदम बढ़ाते हैं या फिर पूर्व की तरह सीमित दायरे में सहमति का दावा किया जाता है।
निर्णायक मोड़ पर परियोजना
दुर्गापुर–शाहपुर कोल परियोजना फिलहाल एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर औद्योगिक विकास और ऊर्जा जरूरतों का तर्क है, तो दूसरी ओर जमीन, आजीविका और अधिकारों को लेकर ग्रामीणों का सशक्त विरोध।
गारे पेलमा कोल ब्लॉक क्षेत्र में भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं, जहां कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से मुआवजा बढ़ाने के उद्देश्य से खेतों में अवैध पोल्ट्री फार्म और गोदाम जैसे निर्माण किए जाने की बात कही जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ये निर्माण हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं और इनकी वैधता की कभी समुचित जांच नहीं हुई। इससे न केवल मुआवजा प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि वास्तविक प्रभावित किसानों के हितों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह मुद्दा भी प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है कि क्या ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी, या फिर इन विवादों के बीच कोयला खदान खोलने का निर्णय जल्दबाजी में लिया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन संवाद और पारदर्शिता का रास्ता चुनता है या फिर यह विवाद और गहराता है।
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