“तमनार के राबो स्कूल में मिसाल: प्राचार्य ने अपने वेतन से 29 मेधावियों को दिया सम्मान, 15 अगस्त बना प्रेरणा दिवस”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
तमनार (रायगढ़)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां एक ओर पूरे देश में तिरंगा शान से लहराया गया, वहीं जिले के तमनार विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राबो में एक ऐसी पहल सामने आई, जिसने शिक्षा और संवेदनशीलता दोनों को एक नई ऊंचाई दी। यहां स्वतंत्रता दिवस का आयोजन केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के सम्मान और प्रेरणा का मंच बन गया।
विद्यालय परिसर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। मंच पर देश के शहीदों और महापुरुषों के चित्र स्थापित किए गए थे, जिनके प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राष्ट्रगान और ध्वजारोहण के बाद जब सम्मान समारोह प्रारंभ हुआ, तो माहौल भावुक और प्रेरणादायक दोनों हो उठा।
प्राचार्य की अनूठी पहल बनी चर्चा का केंद्र
कार्यक्रम का सबसे उल्लेखनीय पहलू रहा विद्यालय के प्राचार्य द्वारा किया गया सम्मान। उन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले 29 विद्यार्थियों को अपने निजी वेतन से 2000-2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति प्रमाण-पत्र प्रदान किए। यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए गर्व का क्षण बनी, बल्कि उपस्थित अभिभावकों और ग्रामीणों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण साबित हुई।
मंच पर जब बच्चों को सम्मानित किया जा रहा था, उनके हाथों में प्रमाण-पत्र और गुलदस्ते थे और चेहरे पर आत्मविश्वास से भरी मुस्कान। कई अभिभावक इस दृश्य को देखकर भावुक नजर आए। यह केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि मेहनत और लगन की सार्वजनिक स्वीकृति थी।
टॉपर्स ने बढ़ाया विद्यालय का मान
कक्षा 10वीं में फत्तेचंद राठिया ने 89.5% अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि कक्षा 12वीं में घनश्याम राठिया 79.8% अंकों के साथ स्कूल टॉपर रहे। दोनों विद्यार्थियों की उपलब्धि को विशेष रूप से सराहा गया।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश
प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के प्रयासों को पहचान देना भी है। उनका मानना है कि जब मेहनत को सम्मान मिलता है, तो अन्य विद्यार्थी भी प्रेरित होते हैं और प्रतिस्पर्धा का स्वस्थ वातावरण बनता है।
ग्रामीण अंचल में इस तरह की पहल का विशेष महत्व है, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद प्रतिभाएं निरंतर उभर रही हैं। विद्यालय के इस प्रयास ने यह संदेश दिया है कि सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलने पर गांव के बच्चे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
समाज से मिली सराहना
कार्यक्रम के बाद अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने प्राचार्य की इस पहल की खुलकर सराहना की। उनका कहना था कि जब शिक्षक अपने व्यक्तिगत संसाधनों से विद्यार्थियों को सम्मानित करते हैं, तो यह शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विद्यालय परिवार ने भी इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए आभार व्यक्त किया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राबो स्कूल का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बन गया—जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।
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