ड्रोन की नजर, मौत से मुठभेड़ टली: हाथियों के बीच सेल्फी स्टंट ने खोली लापरवाही की पोल

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 4 जून 2026।
जंगल में रोमांच की तलाश कई बार जिंदगी पर भारी पड़ सकती है—छाल परिक्षेत्र की हालिया घटना इसका ताजा उदाहरण है। वन विभाग की सतर्कता और तकनीकी निगरानी ने एक ऐसे संभावित हादसे को टाल दिया, जो कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकता था।
दरअसल, 28 मई की शाम, एडू संगम क्षेत्र के आसपास करीब 52 हाथियों का विशाल झुंड विचरण कर रहा था। इस दल में मादा हाथियों के साथ छोटे शावक भी शामिल थे, जबकि एक आक्रामक दंतैल नर हाथी आसपास मंडरा रहा था। वन विभाग इस पूरे मूवमेंट पर ड्रोन कैमरे से लगातार नजर बनाए हुए था—और यहीं से शुरू हुई एक खतरनाक लापरवाही की कहानी।
ड्रोन फुटेज में साफ दिखाई देता है कि एक लाल मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक आरक्षित वन क्षेत्र की ओर बढ़ते हैं। चेतावनियों और जोखिम की जानकारी के बावजूद वे जंगल के भीतर घुस जाते हैं। थोड़ी ही देर में दो अन्य युवक भी उनके साथ जुड़ जाते हैं। पांचों युवक हाथियों की दिशा में बढ़ते हुए दिखाई देते हैं—मानो खतरे को चुनौती दे रहे हों।
स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब झुंड से अलग एक विशाल दंतैल हाथी युवकों की दिशा में मुड़ने लगा। आमतौर पर ऐसे हालात में हाथी बेहद आक्रामक हो सकता है। बावजूद इसके युवक पीछे हटने के बजाय और करीब जाने की कोशिश करते रहे। वन अधिकारियों का मानना है कि यह हरकत संभवतः वीडियो या सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए की जा रही थी—एक ऐसा “स्टंट” जो जानलेवा साबित हो सकता था।
ड्रोन की लाइव मॉनिटरिंग कर रही टीम ने जैसे ही हालात की गंभीरता भांपी, नजरें और सख्त कर दीं। तभी ड्रोन युवकों के काफी करीब पहुंचा। खुद को कैमरे में कैद होता देख युवक घबराए और मौके से भाग निकले। वन विभाग के मुताबिक, यदि कुछ मिनट और देरी होती, तो दंतैल हाथी का हमला निश्चित था—और परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।
वन मंडलाधिकारी, धरमजयगढ़ ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि कानून का सीधा उल्लंघन है। आरक्षित वन क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1)(डी) के तहत अपराध है। वहीं, वन्यजीवों का पीछा करना या उन्हें उकसाना भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय है।
मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और थाना छाल को भी सूचित किया गया है। ड्रोन फुटेज और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध युवकों की पहचान कर ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चेतावनी: जंगल ‘एडवेंचर पार्क’ नहीं है
वन विभाग ने इस घटना के बाद एक बार फिर आम लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों के क्षेत्र में प्रवेश से बचें। हाथियों जैसे संवेदनशील और शक्तिशाली जीवों के करीब जाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह सीधा-सीधा अपनी जान जोखिम में डालना भी है।
तकनीक अब जंगल की भी निगरानी कर रही है—ड्रोन कैमरे हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में “रोमांच” या “रील” के लिए उठाया गया एक गलत कदम, न सिर्फ कानूनी कार्रवाई बल्कि जिंदगी भर का पछतावा भी बन सकता है।
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