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“अपराध पर प्रहार का नया ब्लूप्रिंट: बिलासपुर रेंज में ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू, प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर आईजी की सख्ती”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

बिलासपुर, 21 जुलाई 2026।
अपराध की जड़ों पर प्रहार करने और कानून-व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बिलासपुर रेंज पुलिस ने अब रणनीति को और धारदार कर दिया है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) श्री राम गोपाल गर्ग के नेतृत्व में मंगलवार को आयोजित उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला में “प्रिवेंटिव पुलिसिंग” को केंद्र में रखकर ऐसी कार्ययोजना तैयार की गई, जिसका लक्ष्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराध को पहले ही रोक देना है।

पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के मीटिंग हॉल से संचालित इस कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी और थाना प्रभारी सहित करीब 200 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े। कार्यशाला का फोकस स्पष्ट था—सक्रिय अपराधियों की पहचान, निगरानी और उन पर समय रहते सख्त कार्रवाई।

कार्यशाला के दौरान सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘गुंडा और निगरानी बदमाश’ विषय पर विस्तार से प्रस्तुति देते हुए पुराने पुलिसिंग ढांचे को पुनर्स्थापित करने और निवारक उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों की सटीक पहचान और उनकी गतिविधियों की निरंतर निगरानी ही प्रभावी पुलिसिंग की कुंजी है।

आईजी श्री गर्ग ने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि अब पुलिस की प्राथमिकता “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि “प्रोएक्टिव” होगी। इसी के तहत ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू करने का फैसला लिया गया है, जिसमें हर चिन्हित बदमाश की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपी जाएगी। इससे निगरानी में जवाबदेही तय होगी और अपराधियों पर लगातार दबाव बना रहेगा।

सटीक वर्गीकरण और डिजिटल निगरानी पर जोर
पुलिस रेगुलेशन के प्रावधानों के तहत आदतन अपराधियों को A और B श्रेणी में बांटकर उनका पूरा डाटा अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं। फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों से लेकर गैंग हिस्ट्री शीट तक—हर जानकारी को डिजिटल और मैनुअल रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

सरप्राइज चेकिंग और फील्ड SOPs लागू
आईजी ने बदमाशों की जांच का समय अनिश्चित रखने और टीम आधारित ऑपरेशन पर बल दिया। फील्ड में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को विशेष SOPs भी दिए गए—जैसे चेकिंग के दौरान टॉर्च की पोजिशनिंग, टीम मूवमेंट और संदिग्धों की जीवनशैली की जांच।

कानूनी शिकंजा और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
बार-बार अपराध करने वालों पर BNSS की धारा 480 के तहत जमानत निरस्तीकरण, धारा 110 के तहत बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT NDPS जैसे कड़े प्रावधान लागू करने के निर्देश दिए गए। वहीं, Natgrid और CDR जैसी तकनीकों के जरिए फरार आरोपियों की ट्रैकिंग को भी अनिवार्य किया गया है।

मानवाधिकारों का संतुलन भी प्राथमिकता
सख्ती के बीच आईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। खासकर विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों और नाबालिगों के मामलों में संवेदनशीलता और निजता के अधिकार का पूरा ध्यान रखने की हिदायत दी गई।

गांव स्तर तक खुफिया तंत्र मजबूत
ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB), कोटवारों की सक्रिय भागीदारी, मुसाफिर रजिस्टर और Cri-MAC ऐप के जरिए अंतरराज्यीय सूचना साझा करने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। पुलिस-मित्रों और स्थानीय नेटवर्क को भी इस अभियान में शामिल किया जा रहा है।

सुधार का मौका भी, सख्ती भी
पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जो लोग लंबे समय से अपराध छोड़ चुके हैं, उन्हें निगरानी सूची से हटाकर सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा। वहीं सक्रिय अपराधियों के लिए सख्ती में कोई ढील नहीं होगी।

कार्यशाला के समापन पर आईजी श्री गर्ग ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशों की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करने और जमीनी स्तर पर इनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने दोहराया कि “प्रिवेंटिव पुलिसिंग की सफलता पुलिस और जनता के बीच सीधे संवाद और भरोसे पर निर्भर करती है।”

स्पष्ट है कि बिलासपुर रेंज पुलिस अब अपराध नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए एक ऐसी रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें अपराधियों पर लगातार नजर और समाज के साथ साझेदारी—दोनों को बराबर महत्व दिया जा रहा है।

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Amar Chouhan

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