असम में चुनावी माहौल गरम: भूपेश बघेल–गौरव गोगोई के काफिले पर हमला, सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

नागांव/असम।
असम के नागांव जिले में चुनावी सरगर्मियों के बीच उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कांग्रेस नेताओं के काफिले पर अचानक हमले की घटना सामने आई। जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई एक चुनावी सभा के लिए सामगुरी विधानसभा क्षेत्र के लोरिमुख इलाके की ओर जा रहे थे। इसी दौरान बोरमा क्षेत्र में अज्ञात लोगों ने काफिले को निशाना बनाते हुए पत्थर फेंके।
घटना में कांग्रेस प्रत्याशी शिवमणि बोरा की गाड़ी को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। वाहन के शीशे टूट गए, हालांकि किसी बड़े जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि काफिले में सवार कई लोग बाल-बाल बचे, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
घायल होने का दावा, वीडियो भी आया सामने
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए क्षतिग्रस्त वाहनों की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने दावा किया कि जिस वाहन को निशाना बनाया गया, उसमें एआईसीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे, जिन्हें चोट भी आई है।
गोगोई ने राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आती है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी घटना की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है।
बीजेपी पर आरोप, लेकिन सीएम सरमा का अलग दावा
घटना के बाद कांग्रेस ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला कराने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी लाभ के लिए विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, वहां स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के ही विभिन्न गुटों के बीच मतभेद पहले से मौजूद हैं, और उसी का असर इस घटना में दिखाई देता है।
सीएम ने कांग्रेस नेताओं को “जमीनी हकीकत समझने” की सलाह देते हुए कहा कि बिना तथ्यों के राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है।
चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव, सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर चुनावी दौर में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पथराव की इस वारदात के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
राजनीतिक संदेश और असर
चुनाव के ठीक पहले हुई इस घटना को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष की साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी इसे विपक्ष की आंतरिक खींचतान करार दे रही है।
ऐसे में यह घटना न सिर्फ असम की सियासत को प्रभावित कर सकती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
(नोट: खबर उपलब्ध प्राथमिक जानकारियों और पक्षों के बयानों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।)
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