RTI पर ‘ताला’: 30 दिन तक जानकारी दबाने वाले पंचायत सचिवों पर गिरी कार्रवाई की आंच, प्रथम अपील में तलब

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा/रायगढ़।
जनपद पंचायत घरघोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर पारदर्शिता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की निर्धारित समय-सीमा का खुला उल्लंघन किया गया। ग्राम पंचायत पुसल्दा और टेरम के जनसूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिवों द्वारा 30 दिनों की वैधानिक अवधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद मामला प्रथम अपील तक पहुंच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत घरघोड़ा के प्रथम अपीलीय अधिकारी सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने चार अलग-अलग प्रकरणों में सुनवाई निर्धारित करते हुए संबंधित पंचायत सचिवों को तलब किया। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे 29 जुलाई 2026 को प्रातः 11 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर मांगी गई समस्त जानकारी प्रस्तुत करें। साथ ही यदि सूचना समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, तो उसका लिखित कारण भी बताना अनिवार्य किया गया है।
करोड़ों के खर्च पर मांगा गया था हिसाब
आरटीआई आवेदन के माध्यम से आवेदक ने 1 अप्रैल 2023 से 31 मई 2026 के बीच 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए विकास कार्यों का विस्तृत ब्योरा मांगा था। इसमें खर्च की गई राशि का विवरण, निर्माण कार्यों की मेजरमेंट बुक (MB) की प्रमाणित प्रतियां, निर्माण सामग्री की खरीदी से जुड़े GST बिल, ऑडिट रिपोर्ट तथा पंचायत को प्राप्त राशि और उसके मदवार व्यय की जानकारी शामिल थी।
इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्धारित अवधि में कोई जवाब नहीं दिया गया, जो कि RTI अधिनियम की भावना और प्रावधानों के विपरीत माना जा रहा है।
प्रथम अपील में बढ़ी सख्ती
सूचना नहीं मिलने से परेशान आवेदक को प्रथम अपील का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद अपीलीय अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पंचायत सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन अब इस मामले में लापरवाही को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
खुल सकते हैं वित्तीय अनियमितताओं के राज
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि मांगे गए दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं, तो पंचायतों में हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता, खरीदी प्रक्रिया, भुगतान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम पहलू सामने आ सकते हैं। इससे सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी वास्तविक परीक्षण संभव होगा।
बड़ा सवाल— सूचना देने में देरी क्यों?
RTI कानून नागरिकों को समयबद्ध सूचना पाने का अधिकार देता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं, तो जानकारी देने में देरी क्यों हुई? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जानबूझकर सूचना छिपाने का प्रयास? इन सवालों के जवाब अब प्रथम अपील की सुनवाई में सामने आने की उम्मीद है।
अब नजरें सुनवाई पर टिकीं
जनपद पंचायत घरघोड़ा में प्रस्तावित सुनवाई को लेकर क्षेत्र में उत्सुकता बनी हुई है। यदि संबंधित अधिकारी संतोषजनक जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं। वहीं, जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक निर्देशों के बाद पंचायत सचिव पारदर्शिता की राह अपनाते हैं या फिर सूचना छिपाने का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।
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