बारिश के बीच उद्यमियों ने समझे कारोबार बढ़ाने के वित्तीय रास्ते, भावसार फाउंडेशन की पहल को गांवों तक ले जाने की मांग


RAMP योजना के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बैंकिंग सुविधाओं, वैकल्पिक वित्त और ऋण प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी; महिला स्वरोजगार योजनाओं पर भी हुई चर्चा

रायगढ़, 28 अक्टूबर 2026। कारोबार शुरू करना एक चुनौती है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए समय पर पूंजी जुटाना और सही वित्तीय विकल्प चुनना भी किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं। खासकर छोटे उद्यमियों के सामने बैंकिंग प्रक्रियाओं, ऋण की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और उपलब्ध वित्तीय योजनाओं की जानकारी का अभाव कई बार उनके विकास की राह में बाधा बनता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भावसार फाउंडेशन ने रायगढ़ में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े लोगों के लिए वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। लगातार बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद 30 हितग्राहियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम के प्रति उनकी रुचि को रेखांकित किया।
भारत सरकार की RAMP योजना के अंतर्गत 28 अक्टूबर को सुबह 11 बजे ढीमरापुर रोड स्थित लक्ष्मी हाइट्स के चंद्रा समाज सामुदायिक भवन में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम का विषय ‘Alternate Finance & Banking Access for MSMEs’ रखा गया था। इसमें उद्यमियों को पारंपरिक बैंक ऋण के अलावा उपलब्ध वैकल्पिक वित्तीय साधनों, बैंकिंग सेवाओं, ऋण प्रक्रिया और कारोबार के विस्तार के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें केवल वित्तीय योजनाओं का परिचय देने तक बात सीमित नहीं रही, बल्कि उद्यमियों को अपने कारोबार की जरूरतों के अनुरूप वित्तीय विकल्पों का आकलन करने, दस्तावेज व्यवस्थित रखने और पुनर्भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की जानकारी भी दी गई।
वित्तीय जानकारी के बिना कारोबार का विस्तार चुनौतीपूर्ण
कार्यक्रम के प्रारंभ में भावसार फाउंडेशन के प्रतिनिधि राजेश पटेल ने संस्था की गतिविधियों, सामाजिक भूमिका और आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छोटे एवं मध्यम उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं की सही जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें व्यवसाय के विकास के लिए उचित मार्गदर्शन देना ऐसे कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है।
स्वागत उद्बोधन में श्रीमती माया दत्ता ने MSME क्षेत्र को स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि छोटे व्यवसायियों को कारोबार शुरू करने से लेकर कार्यशील पूंजी जुटाने, बैंकिंग प्रक्रियाओं को समझने और व्यवसाय का विस्तार करने तक कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय विकल्पों की जानकारी और सही मार्गदर्शन मिलने से उद्यमी अपने कारोबार की जरूरतों के अनुरूप बेहतर निर्णय ले सकते हैं। ऐसे प्रयास आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी 30 हितग्राहियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
डिजिटल फाइनेंस से लेकर इनवॉइस फाइनेंसिंग तक समझाए विकल्प
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में आदित्य गर्ग एंड कंपनी की सुश्री चांदनी देवांगन ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से MSME के लिए उपलब्ध वैकल्पिक वित्तीय साधनों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल फाइनेंस, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), इनवॉइस फाइनेंसिंग, TReDS, सप्लाई चेन फाइनेंस, CGTMSE तथा कार्यशील पूंजी की व्यवस्था जैसे विषयों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि कारोबार की प्रकृति और जरूरत के अनुसार वित्तीय संसाधनों का चयन करना महत्वपूर्ण है। मशीनरी एवं उपकरण खरीदने, दैनिक व्यावसायिक खर्चों को पूरा करने अथवा कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए वित्तीय जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में किसी एक विकल्प को सभी व्यवसायों के लिए उपयुक्त मानने के बजाय उपलब्ध सुविधाओं और उनकी शर्तों को समझना जरूरी है।
वित्तीय दस्तावेजों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने बैंक स्टेटमेंट, आय-व्यय विवरण, जहां लागू हो वहां GST रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न (ITR) और प्रोजेक्ट रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने की सलाह दी। उन्होंने ऋण पात्रता, पुनर्भुगतान क्षमता, ब्याज दरों, अन्य शुल्कों और वित्तीय शर्तों का आकलन करने के बाद ही किसी सुविधा का लाभ लेने की बात कही।
विशेषज्ञ मार्गदर्शन का उद्देश्य उद्यमियों को यह समझाना था कि वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए केवल ऋण के विकल्पों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। कारोबार की वास्तविक जरूरत, उपलब्ध संसाधन और भविष्य में भुगतान करने की क्षमता को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय ही अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
बैंकिंग सुविधाओं के साथ महिला स्वरोजगार पर विशेष जोर
इसके बाद छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की कोतरा रोड शाखा, रायगढ़ के शाखा प्रबंधक भूपेंद्र पटेल ने बैंकिंग सुविधाओं, ऋण प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने उद्यमियों को अपने व्यवसाय की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग सेवाओं को समझने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने महिला आर्थिक सशक्तीकरण और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी साझा की। इस दौरान ‘महतारी शक्ति ऋण योजना’ का उल्लेख करते हुए पात्र महिलाओं के लिए 25 हजार रुपये तक के ऋण की जानकारी दी गई। उन्होंने इच्छुक महिलाओं को योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और लागू शर्तों की पुष्टि संबंधित बैंक शाखा से करने की सलाह दी।
इसके अतिरिक्त ‘स्वयं सिद्धा’ पहल के संबंध में भी जानकारी साझा की गई। महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में HDFC बैंक की श्रीमती मनीषा और सुश्री झरना भी उपस्थित रहीं। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं एवं उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं के संबंध में प्रतिभागियों को जागरूक किया तथा वित्तीय जानकारी के महत्व पर प्रकाश डाला।
महिला स्वरोजगार से संबंधित चर्चा का एक प्रमुख उद्देश्य यह रहा कि इच्छुक महिलाएं उपलब्ध वित्तीय विकल्पों को समझकर अपने स्तर पर व्यवसाय शुरू करने या पहले से संचालित गतिविधियों का विस्तार करने की संभावनाओं पर विचार कर सकें। हालांकि, किसी भी ऋण योजना का लाभ संबंधित पात्रता और निर्धारित शर्तों के अधीन ही प्राप्त किया जा सकता है।
प्रशिक्षण किट वितरित, सवालों और चर्चाओं में शामिल हुए हितग्राही
कार्यक्रम के दौरान सभी 30 हितग्राहियों को प्रशिक्षण किट वितरित की गई। प्रतिभागियों के लिए जलपान और भोजन की व्यवस्था भी की गई। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने वित्तीय साधनों, बैंकिंग प्रक्रियाओं और ऋण से संबंधित विषयों पर जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उनके अनुसार, वैकल्पिक वित्तीय साधनों, बैंकिंग सुविधाओं और व्यवसाय विस्तार के विकल्पों के बारे में मिली जानकारी भविष्य में व्यावसायिक निर्णय लेने में सहायक हो सकती है।
महिला स्वरोजगार योजनाओं से संबंधित जानकारी को भी प्रतिभागियों के लिए उपयोगी बताया गया। आयोजन के माध्यम से उद्यमियों को उपलब्ध वित्तीय विकल्पों को समझने और जरूरत के अनुसार संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क करने का अवसर मिला।
बारिश के बावजूद पहुंचे सरपंच और पूर्व सरपंच, गांवों में कार्यक्रम कराने की मांग
कार्यक्रम के दौरान प्रतिकूल मौसम के बावजूद आसपास के गांवों से आए सरपंचों, पूर्व सरपंचों और अन्य हितग्राहियों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। लगातार बारिश के बीच भी कई प्रतिभागी कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे और निर्धारित सत्रों में शामिल हुए।
आयोजकों के अनुसार, इससे पहले आयोजित दो जागरूकता कार्यक्रमों से मिले सकारात्मक अनुभवों के बाद इस आयोजन को लेकर भी लोगों में रुचि दिखाई दी। ग्रामीण क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम की उपयोगिता की सराहना करते हुए भावसार फाउंडेशन से आग्रह किया कि भविष्य में इसी तरह के कार्यक्रम उनके गांवों में भी आयोजित किए जाएं।
उनका मानना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आयोजन होने से छोटे दुकानदारों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों, महिला उद्यमियों और नया व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं एवं वित्तीय योजनाओं की जानकारी पहुंच सकेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय जागरूकता की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटे व्यवसायियों को अक्सर यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि उनकी व्यावसायिक जरूरतों के लिए कौन-सी वित्तीय सुविधा उपयुक्त हो सकती है और उसके लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होने से ऐसे सवालों पर सीधे चर्चा करने और संबंधित संस्थानों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
जनप्रतिनिधियों की ओर से गांवों में कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह इस आयोजन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात रही। इससे भविष्य में ग्रामीण स्तर पर वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे प्रयासों की संभावनाएं सामने आईं।
मौसम बिगड़ने पर प्रतिभागियों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता
दोपहर के भोजन के बाद मौसम और खराब होने तथा बारिश बढ़ने के कारण प्रतिभागियों की सुविधा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। दूरस्थ गांवों से आए हितग्राहियों को उनके गंतव्य की ओर सुरक्षित रवाना करने की व्यवस्था की गई।
प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच कार्यक्रम का संचालन व्यवस्थित रूप से किया गया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण सामग्री के वितरण और प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं जलपान की व्यवस्था के माध्यम से आयोजकों ने कार्यक्रम को उपयोगी बनाने का प्रयास किया।
वित्तीय जागरूकता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की पहल
भावसार फाउंडेशन की इस पहल ने MSME उद्यमियों के सामने उपलब्ध वित्तीय विकल्पों, बैंकिंग प्रक्रियाओं और संस्थागत वित्तीय सहयोग को समझने का अवसर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ऋण सुविधाओं के साथ-साथ वित्तीय दस्तावेजों के रखरखाव, पुनर्भुगतान क्षमता और कारोबार की जरूरतों के अनुरूप निर्णय लेने पर जोर दिया गया।
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम छोटे उद्यमियों को अधिक जानकारीपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने और अपने व्यवसाय की संभावनाओं को समझने में मदद करेंगे। वहीं, गांवों में भी इसी तरह के आयोजन कराने के लिए जनप्रतिनिधियों की मांग ने ग्रामीण उद्यमियों और महिला स्वरोजगार समूहों तक वित्तीय जागरूकता पहुंचाने की दिशा में आगे काम करने की संभावना को बल दिया।
कार्यक्रम का व्यापक संदेश यही रहा कि छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की उपलब्धता जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है वित्तीय विकल्पों की सही जानकारी, दस्तावेजों की तैयारी और जिम्मेदारी के साथ लिए गए व्यावसायिक निर्णय।
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