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40 महिलाओं की किस्तों के ₹7.58 लाख लेकर फरार हुआ कलेक्शन एजेंट, हैदराबाद में कपड़े की दुकान पर मिला

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ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई, मोबाइल बंद कर ठिकाना बदल रहा था आरोपी; कोतवाली पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर भेजा जेल

रायगढ़। फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने वाली 40 महिला हितग्राहियों की किस्तों और ऋण खाते बंद कराने के नाम पर रकम लेने के बाद उसे कंपनी में जमा नहीं करने के मामले में रायगढ़ पुलिस ने एक युवक को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर कुल 7 लाख 58 हजार 937 रुपये के गबन का आरोप है। कंपनी में कलेक्शन एजेंट के पद पर काम करने वाला युवक शिकायत सामने आने के बाद कथित तौर पर मोबाइल बंद कर फरार हो गया था। लंबे समय तक उसका पता नहीं चलने पर पुलिस ने उसकी तलाश दूसरे राज्य में की। आखिरकार हैदराबाद के बंजारा हिल्स क्षेत्र में एक कपड़े की दुकान पर सेल्समैन के रूप में काम करते हुए उसे पकड़ लिया गया।

मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान विक्रम सिंह सिदार (20 वर्ष), पिता बाबूलाल सिदार, निवासी अमेराडीह, वार्ड क्रमांक 03, पोस्ट पिहरीद, थाना मालखरौदा, जिला सक्ती के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे रायगढ़ लाकर विधिवत गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

किस्तों की रकम लेने के बाद कंपनी में जमा नहीं करने का आरोप

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भारत फाइनेंशियल इनक्लूजन लिमिटेड की रायगढ़ शाखा के वर्तमान शाखा प्रबंधक वासुदास मानिकपुरी ने 31 अगस्त 2026 को थाना सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कंपनी के पूर्व कलेक्शन एजेंट विक्रम सिंह सिदार पर महिला हितग्राहियों से ऋण की किस्तें और बकाया ऋण का एकमुश्त भुगतान लेने के बाद रकम कंपनी में जमा नहीं करने का आरोप लगाया गया।

शिकायत के मुताबिक, यह मामला सितंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच का है। इस अवधि में आरोपी ने कथित तौर पर 40 महिला हितग्राहियों से अलग-अलग अवसरों पर ऋण की किस्तों और बकाया राशि के भुगतान के नाम पर पैसे लिए। आरोप है कि संबंधित रकम कंपनी के खातों में जमा नहीं की गई। बाद में महिलाओं की ओर से इस संबंध में शाखा कार्यालय में लिखित शिकायतें भी दी गईं।

कंपनी की शिकायत में कुल 7,58,937 रुपये की राशि लंबित होने की बात कही गई है। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग महिला हितग्राहियों से प्राप्त रकम और उनके खातों की स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

रकम जमा करने का आश्वासन देने के बाद मोबाइल बंद

शिकायत के अनुसार, जब आरोपी से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया, तब उसने कुछ दिनों के भीतर रकम कंपनी में जमा करने की बात कही थी। लेकिन बाद में उसका मोबाइल फोन बंद हो गया और वह उपलब्ध नहीं हुआ। इसके बाद कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 482/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई।

जांच में सामने आए खातों और पासबुक के दस्तावेज

पुलिस ने विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता और संबंधित महिला हितग्राहियों के बयान दर्ज किए। साथ ही 31 ग्राहकों के खातों से संबंधित लेजर तथा पासबुक की सत्यापित छायाप्रतियां जब्त की गईं। पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों में कुल 7,58,937 रुपये की राशि लंबित दर्शाई गई है।

जांच के दौरान आरोपी के गृह पते पर भी पतासाजी की गई, लेकिन उसके फरार होने की जानकारी मिली। इसके बाद उसके संभावित ठिकानों के संबंध में जानकारी जुटाई गई। पुलिस को जब आरोपी के हैदराबाद में होने का इनपुट मिला, तब उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना की गई।

बंजारा हिल्स की दुकान में सेल्समैन के रूप में कर रहा था काम

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सिटी कोतवाली की टीम ने हैदराबाद में दबिश दी। थाना प्रभारी के निर्देशन में एएसआई विलफ्रेड मसीह और प्रधान आरक्षक प्रकाश तिवारी को आरोपी की तलाश के लिए भेजा गया था।

पुलिस के अनुसार, टीम ने हैदराबाद के बंजारा हिल्स क्षेत्र में पतासाजी की। इसी दौरान आरोपी एक कपड़े की दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करता मिला। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और आगे की कार्रवाई के लिए रायगढ़ लेकर आई।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर गबन की गई रकम खर्च कर देना बताया। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से जारी जेल वारंट के आधार पर उसे जेल दाखिल करा दिया गया।

छोटे ऋण और नियमित किस्तों से जुड़ा मामला

यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत में उन महिला हितग्राहियों की रकम का उल्लेख है, जिन्होंने फाइनेंस कंपनी से ऋण लिया था और जिनकी किस्तों के संग्रह की जिम्मेदारी कलेक्शन एजेंट के पास थी। ऐसे मामलों में भुगतान की रसीद, ऋण खाते में दर्ज प्रविष्टियां और कंपनी के रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच महत्वपूर्ण होती है।

फिलहाल पुलिस की ओर से जारी जानकारी के आधार पर आरोपी पर रकम गबन करने का आरोप है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

रायगढ़ पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।

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Amar Chouhan

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