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कक्षा में मेधावी छात्र से वायुसेना के जांबाज तक का सफर, हरेराम गुप्ता ने बढ़ाया तमनार का मान

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सहयोग विद्या मंदिर के पूर्व छात्र हरेराम आज भारतीय वायुसेना में नायक के पद पर दे रहे सेवाएं, कभी 12वीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर बनाई थी अलग पहचान

तमनार, रायगढ़। कुछ उपलब्धियां केवल किसी व्यक्ति की सफलता तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि अपने साथ परिवार, गांव, क्षेत्र और उस शिक्षण संस्थान का मान भी बढ़ाती हैं, जहां से उस व्यक्ति ने अपने सपनों की पहली उड़ान भरी होती है। ग्राम महलोई के हरेराम गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सहयोग विद्या मंदिर, तमनार से गणित संकाय में पढ़ाई करने वाले हरेराम ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के दम पर शिक्षा के क्षेत्र में पहचान बनाई और आगे चलकर भारतीय वायुसेना में पहुंचकर राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। वर्तमान में वे वायुसेना में नायक के पद पर कार्यरत हैं।

विद्यालय परिवार ने अपने इस पूर्व छात्र की उपलब्धियों को गौरव का विषय बताते हुए उनके प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। हरेराम की यात्रा उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं।

12वीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक, यहीं से खुलीं आगे बढ़ने की राहें

हरेराम गुप्ता ग्राम महलोई निवासी श्री कान्हूराम गुप्ता के सुपुत्र हैं। उन्होंने सहयोग विद्या मंदिर, तमनार से गणित संकाय में अध्ययन करते हुए कक्षा 12वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। उनकी इस उपलब्धि ने आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार तैयार किया।

विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक विशेष शैक्षणिक पहल की गई थी। इसके तहत प्रदेशभर के लगभग 2,000 टॉपर विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें छह महीने तक कोचिंग प्रदान की गई। कोचिंग के बाद विद्यार्थियों की दोबारा परीक्षा ली गई, जिसमें 10 विद्यार्थियों को सफलता मिली।

बताया जाता है कि सफल विद्यार्थियों में रायगढ़ जिले के तीन छात्र शामिल थे। इनमें सहयोग विद्या मंदिर, तमनार के हरेराम गुप्ता भी एक थे। यह उपलब्धि उनकी शैक्षणिक क्षमता के साथ-साथ कठिन प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की योग्यता को भी दर्शाती है।

शिक्षा से राष्ट्रसेवा तक पहुंचा सफर

हरेराम के जीवन की दिशा में भारतीय वायुसेना में चयन एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। विद्यालय परिवार के अनुसार, उनका चयन वायुसेना की विशेष इकाई गरुड़ कमांडो के लिए हुआ था। गरुड़ कमांडो भारतीय वायुसेना की विशेष बल इकाई है, जिसे कठिन प्रशिक्षण और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए तैयार किया जाता है।

वायुसेना में सेवा का चुनाव केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और जिम्मेदारी से जुड़ा निर्णय भी है। ऐसे क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता, निरंतर अभ्यास और आदेशों के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।

एक मेधावी विद्यार्थी के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने वाले हरेराम का आज वायुसेना में नायक के पद पर कार्यरत होना इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा से अर्जित आधार और व्यक्तिगत संकल्प जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।

सौम्य स्वभाव और अनुशासन से बनाई अलग पहचान

सहयोग विद्या मंदिर परिवार के अनुसार, विद्यार्थी जीवन में हरेराम की पहचान एक सौम्य, अनुशासित, आज्ञाकारी और प्रतिभावान छात्र के रूप में थी। शिक्षकों और विद्यालय से जुड़े लोगों के बीच उनकी यही विशेषताएं उनकी उपलब्धियों के साथ याद की जाती हैं।

किसी विद्यार्थी की सफलता को केवल परीक्षा के अंकों से नहीं मापा जा सकता। उसके व्यवहार, जिम्मेदारी निभाने की क्षमता और जीवन में अपनाए गए मूल्यों की भी उतनी ही अहमियत होती है। हरेराम के बारे में विद्यालय परिवार की प्रतिक्रिया में इन्हीं गुणों का उल्लेख किया गया है।

उनकी उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय मानी जा रही है कि उन्होंने अपने गांव और क्षेत्र से निकलकर देश की एक महत्वपूर्ण सैन्य सेवा में स्थान बनाया। इससे ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को भी यह संदेश मिलता है कि प्रतिभा को सही दिशा और निरंतर मेहनत का साथ मिले, तो आगे बढ़ने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।

इकलौते पुत्र होकर भी राष्ट्रसेवा को चुना

विद्यालय परिवार ने हरेराम के पारिवारिक पक्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इसके बावजूद उन्होंने राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया और भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

माता-पिता के लिए संतान की सफलता गर्व का विषय होती है, लेकिन जब वही संतान देश की सुरक्षा और सेवा से जुड़ी जिम्मेदारी निभाती है, तो यह गर्व एक व्यापक सामाजिक भावना का रूप ले लेता है। हरेराम की उपलब्धियों को भी इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।

ग्राम महलोई से लेकर तमनार के शैक्षणिक परिवेश तक, उनकी सफलता उन लोगों के लिए खुशी का अवसर है, जिन्होंने उनके विद्यार्थी जीवन को देखा है और उनकी प्रगति से परिचित रहे हैं।

विद्यालय के लिए गौरव, विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा

सहयोग विद्या मंदिर, तमनार ने अपने पूर्व छात्र की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हरेराम गुप्ता और उनके पूरे परिवार के सुखद, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

विद्यालयों की पहचान केवल उनके भवन, संसाधनों या परीक्षा परिणामों से नहीं बनती। वहां से शिक्षा प्राप्त कर जीवन में अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले विद्यार्थी भी संस्थान की पहचान को व्यापक बनाते हैं। हरेराम जैसे पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां वर्तमान विद्यार्थियों के सामने ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिनसे वे अपने लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा ले सकते हैं।

हरेराम गुप्ता की कहानी का सार यही है कि एक ओर कक्षा में अर्जित शैक्षणिक उपलब्धि है, तो दूसरी ओर देश की सेवा के लिए चुना गया जिम्मेदारी भरा रास्ता। ग्राम महलोई के इस बेटे की प्रगति से परिवार और विद्यालय गौरवान्वित हैं। उनकी आगे की यात्रा के लिए सहयोग विद्या मंदिर परिवार ने शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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Amar Chouhan

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