शादी का वादा, छह महीने साथ रखने का आरोप; नाबालिग से दुष्कर्म मामले में लैलूंगा पुलिस ने युवक को भेजा जेल


अभियान संवेदना के तहत कार्रवाई, 19 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने 24 घंटे के भीतर न्यायिक रिमांड पर भेजने की दी जानकारी
रायगढ़, 26 अक्टूबर 2026। नाबालिग बालिकाओं से जुड़े अपराधों में त्वरित कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे अभियान संवेदना के तहत लैलूंगा पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में 19 वर्षीय युवक संजय यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामले में पीड़िता की मां की शिकायत पर अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जंगल में बैल चराने गई थी बालिका, घर लौटने पर बताई घटना
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मामले की शुरुआत फरवरी 2025 की एक घटना से जुड़ी है। पीड़िता की मां ने थाना लैलूंगा में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनकी लगभग 17 वर्षीय बेटी गांव के जंगल में बैल चराने गई थी। दोपहर करीब 12 बजे जब वह घर लौटी, तो रो रही थी। परिजनों ने उससे रोने का कारण पूछा, तब उसने पास के गांव के युवक संजय यादव पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि युवक ने बालिका को शादी कर पत्नी के रूप में रखने का भरोसा दिया था। आरोप के अनुसार, बालिका के नाबालिग होने की जानकारी के बावजूद युवक उसे अपने साथ ले गया और करीब छह महीने तक अपने साथ रखकर उसका शारीरिक शोषण करता रहा। परिजनों द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद भी आरोपी के नहीं मानने की बात शिकायत में कही गई है।
जन्म प्रमाण पत्र और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर थाना लैलूंगा में अपराध क्रमांक 329/2026 दर्ज किया। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की धारा 4 और 6 के तहत कार्रवाई की गई है।
विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता की उम्र के सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र जब्त किया और उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके बाद आरोपी की तलाश कर उसे हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया। हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होती है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी का चिकित्सकीय परीक्षण कराने और मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तारी के कारण बताए गए तथा नियमानुसार गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तारी और रिमांड की कार्रवाई 24 घंटे के भीतर पूरी किए जाने की जानकारी दी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन तथा धरमजयगढ़ एसडीओपी सिद्धांत तिवारी के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, लैलूंगा थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गिरधारी साव, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक प्रीतम बघेल, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक शुभम मिश्रा, प्रधान आरक्षक जयशरण चंद्रा और आरक्षक सुमित एक्का की इसमें अहम भूमिका रही।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशील जांच जरूरी
यह मामला नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों की जांच में त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ पीड़िता की निजता और गरिमा की रक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित करना कानूनन प्रतिबंधित है। इसलिए समाचार में बालिका का नाम, पता, परिवार की पहचान या ऐसा कोई विवरण शामिल नहीं किया गया है जिससे उसकी पहचान हो सके।
नोट: आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। दोषसिद्धि का निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा।
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