‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सियासत गरम: बघेल का निशाना CEC पर, आयोग ने कहा—प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कथित ‘वोट चोरी’ के मामले में ज्ञानेश कुमार केवल एक “मोहरा” हैं, जबकि इसका राजनीतिक लाभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिल रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी निर्णय तय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिए जा रहे हैं।
बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
पत्रकारों से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर कांग्रेस गंभीर है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं और इसी कारण पार्टी अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।
बघेल ने यह भी संकेत दिए कि कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है और आने वाले समय में राज्य से लेकर बूथ स्तर तक अभियान चलाया जाएगा।
कांग्रेस की रणनीति: बूथ स्तर तक पहुंच
कांग्रेस की रणनीति के तहत उन मतदाताओं तक पहुंचने की योजना बनाई जा रही है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों को दस्तावेजों के साथ सामने लाया जाएगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालों को मजबूती मिल सके।
इसके साथ ही, पार्टी ने शांतिपूर्ण आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाने की बात भी कही है।
चुनाव आयोग का पक्ष
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि SIR और मतदाता सूची में किए गए संशोधन पूरी तरह स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। आयोग ने यह भी कहा कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता का सवाल नहीं उठता।
आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची में बदलाव एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत समय-समय पर अपडेट किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस पूरे विवाद ने अब न्यायिक मोड़ भी ले लिया है। CEC की कार्यप्रणाली और SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट की सुनवाई के बाद इस मामले में कई अहम पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है।
आरोप बनाम प्रक्रिया, सच्चाई का इंतजार
फिलहाल ‘वोट चोरी’ और चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोप राजनीतिक दावों और उनके जवाबों के बीच केंद्रित हैं। एक ओर कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक और पारदर्शी बता रहा है।
आने वाले दिनों में राजनीतिक अभियान और न्यायिक प्रक्रिया—दोनों ही इस विवाद की दिशा तय करेंगे। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपों और तथ्यों के बीच वास्तविक स्थिति क्या निकलकर सामने आती है।
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