फर्जी साइन से घिरी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया: SIA रिपोर्ट पर उठे बड़े सवाल, FIR की मांग तेज

कोतरमरा की ग्राम पंचायत प्रतिनिधि बोलीं—जनसुनवाई में गई ही नहीं, फिर रिपोर्ट में मेरे नाम से
अंग्रेजी में हस्ताक्षर किसने किए? थाना प्रभारी से एफआईआर की मांग
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। पुसौर विकासखंड के ग्राम कोतरमरा में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सामाजिक समाघात आकलन (SIA) रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों और किसानों ने थाना पुसौर में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जनसुनवाई में अनुपस्थित रही ग्राम पंचायत प्रतिनिधि के नाम से रिपोर्ट में कथित तौर पर हस्ताक्षर कर दिए गए। मामला सामने आते ही न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं, बल्कि दस्तावेजों की विश्वसनीयता भी कटघरे में खड़ी हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, 19 जून 2026 को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोतरमरा में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के लिए सामाजिक समाघात आकलन की जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया के लिए गठित दल ‘ख’ में स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि के रूप में क्रमांक-2 पर ग्राम पंचायत कोतरमरा की प्रतिनिधि श्रीमती राजकुमारी पटेल का नाम दर्ज था। शिकायत में कहा गया है कि वे इस जनसुनवाई में शामिल ही नहीं हुईं, इसके बावजूद 20 जुलाई 2026 को तैयार प्रतिवेदन में उनके नाम के सामने अंग्रेजी में हस्ताक्षर दर्ज पाए गए।

“न तो मैं गई, न ऐसा साइन किया”
ग्रामीणों के अनुसार जब इस संबंध में राजकुमारी पटेल से पूछताछ की गई, तो उन्होंने साफ तौर पर हस्ताक्षर से इंकार करते हुए कहा कि वे जनसुनवाई में गई ही नहीं थीं और अंग्रेजी में हस्ताक्षर भी नहीं करतीं। यह बयान पूरे मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि सवाल सीधे उस प्रक्रिया पर उठ रहे हैं जिसके आधार पर भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील निर्णय लिए जाते हैं।
दस्तावेजी प्रक्रिया पर उठे कई सवाल
मामले में सबसे अहम प्रश्न यह है कि यदि संबंधित प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं थीं, तो उनके नाम से हस्ताक्षर किसने और किन परिस्थितियों में किए? क्या रिपोर्ट तैयार करने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन हुआ था? क्या किसी स्तर पर औपचारिकता पूरी करने के लिए नाम का उपयोग किया गया? इन सवालों के जवाब फिलहाल अनुत्तरित हैं, लेकिन शिकायत ने जांच की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।
भूमि अधिग्रहण से जुड़ा संवेदनशील पहलू
यह प्रकरण कलेक्टोरेट रायगढ़ से जारी आदेश क्रमांक लैंड-43/272/2026 (दिनांक 07 मई 2026) तथा राजस्व अभिलेखों से संबंधित दस्तावेजों से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि SIA रिपोर्ट भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया की नींव होती है, ऐसे में यदि इसमें ही गड़बड़ी के आरोप लगते हैं तो आगे की कार्रवाई की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
एफआईआर की मांग, पुलिस जांच पर टिकी नजर
शिकायतकर्ताओं ने थाना प्रभारी पुसौर से मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदन के साथ बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी संलग्न बताए जा रहे हैं। अब निगाहें पुलिस और प्रशासन पर हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और कथित फर्जी हस्ताक्षर के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या तंत्र की पहचान कैसे की जाती है।
पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
कोतरमरा का यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रह गया है। यह उन सभी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करता है, जिनके आधार पर जमीन अधिग्रहण और विस्थापन जैसे फैसले लिए जाते हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि जवाबदेही के बड़े संकट की ओर इशारा करेगा।
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