खसरा 154/1ख/1 विवाद फिर गरमाया: कब्जा, समतलीकरण और बाउंड्री निर्माण के आरोपों पर शिकायत, तहसीलदार व थाना प्रभारी से हस्तक्षेप की मांग

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़।
जिले के बांजीपाली गांव में स्थित खसरा नंबर 154/1ख/1 की भूमि को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। प्रार्थी फत्तेचन्द पटेल ने तहसीलदार रायगढ़ और थाना प्रभारी जूटमिल को लिखित आवेदन देकर अपनी पैतृक भूमि पर कथित रूप से मलबा डालकर समतलीकरण, बाउंड्री निर्माण और कब्जे के प्रयास का गंभीर आरोप लगाया है। आवेदन में उन्होंने मौके पर तत्काल हस्तक्षेप करते हुए यथास्थिति बनाए रखने और सीमांकन कराने की मांग की है।
प्रार्थी के अनुसार विवादित भूमि का रकबा लगभग 1.85 एकड़ है, जबकि सामने पक्ष की बताई जा रही भूमि खसरा नंबर 155/1ख लगभग 0.068 हेक्टेयर दर्ज है। दोनों खसरा नंबरों की सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है, जो समय-समय पर तनाव का कारण बनता रहा है।
वर्षों पुराने विवाद का दोहराव
शिकायत में प्रार्थी ने उल्लेख किया है कि पिछले करीब एक दशक से अधिक समय से उनकी भूमि की सीमाओं को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। उनका आरोप है कि अलग-अलग समय पर भूमि के निचले हिस्से में मिट्टी डालकर उसे भरने और समतल करने का प्रयास किया गया, जिसका उन्होंने विरोध किया।
आवेदन के अनुसार कोविड काल के बाद भी ऐसी गतिविधियां दोबारा सामने आईं, जब उनकी अनुपस्थिति में रात के समय कथित तौर पर मलबा डालकर जमीन को समतल करने का प्रयास किया गया। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया है कि इसी क्रम में लगभग ढाई फीट ऊंची बाउंड्रीवाल का निर्माण भी शुरू किया गया था, जिसे आपत्ति और प्रशासनिक हस्तक्षेप की चेतावनी के बाद तोड़ दिया गया।
बाहरी दबाव और प्रभाव का आरोप
प्रार्थी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि भूमि पर कब्जे के प्रयास में लंबे समय से स्थानीय स्तर पर दबंगई, बाहरी प्रभाव और कथित राजनीतिक संरक्षण का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने आवेदन में किसी व्यक्ति विशेष का स्पष्ट नाम नहीं लिया है, लेकिन यह दावा किया है कि संगठित तरीके से भूमि पर कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि नगर निगम से संबंधित जेसीबी और ट्रैक्टर के उपयोग से मौके पर मलबा डलवाकर समतलीकरण किए जाने की जानकारी उन्हें स्थानीय लोगों से मिली है, जिसकी जांच की मांग की गई है।
राजस्व निरीक्षण और पंचनामा पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूर्व में राजस्व विभाग के पटवारी एवं निरीक्षक की मौजूदगी में सीमांकन और स्थल निरीक्षण किया गया था तथा पंचनामा तैयार हुआ था। हालांकि प्रार्थी का कहना है कि बारिश, जलभराव और झाड़ियों के कारण उस समय सटीक सीमांकन संभव नहीं हो सका, जिस कारण वे उस प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
न्यायालयीन आदेशों का हवाला
आवेदन में प्रार्थी ने यह भी दावा किया है कि उनके पक्ष में पूर्व में व्यवहार न्यायालय रायगढ़ से वर्ष 2017 में एक निर्णय पारित हुआ था, जो बाद में अपील स्तर पर भी उनके पक्ष में गया। हालांकि इस मामले से संबंधित कुछ प्रकरणों में उच्च न्यायालय में अपील लंबित होने की बात भी सामने आई है।
प्रार्थी का कहना है कि न्यायालयीन आदेशों के बावजूद भूमि पर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तत्काल निर्माण गतिविधियों को रोका जाए, भूमि पर यथास्थिति सुनिश्चित की जाए तथा दोनों पक्षों की मौजूदगी में निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए, ताकि वास्तविक सीमा स्थिति स्पष्ट हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने कथित अवैध कब्जे के प्रयासों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रतीक्षा
यह पूरा मामला फिलहाल शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की पुष्टि या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वास्तविक स्थिति का निर्धारण राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन प्रक्रिया और न्यायालयीन दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और संबंधित पक्ष का पक्ष आने के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट होगी।
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