दिवाली की सुबह दिल्ली की हवा बनी जहरीली, कई इलाकों में AQI 443 तक पहुंचा; पांच शहरों के प्रदूषण स्तर में बड़ा अंतर

दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज, पटना और लखनऊ की हवा भी खराब; मुंबई में मध्यम तो चंडीगढ़ में अपेक्षाकृत बेहतर रही स्थिति, प्रदूषण ने त्योहार की खुशियों के बीच बढ़ाई स्वास्थ्य संबंधी चिंता
नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार जहां देशभर में रोशनी, उत्साह और खुशियों के साथ मनाया जा रहा है, वहीं राजधानी दिल्ली की सुबह जहरीली हवा और धुंध के बीच हुई। रविवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया। कुछ स्थानों पर यह स्तर 440 के करीब दर्ज किया गया। प्रदूषण की गंभीर स्थिति के कारण सुबह के समय दृश्यता भी प्रभावित रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम क्षेत्र में सुबह करीब आठ बजे AQI 431 रहा, जबकि द्वारका सेक्टर-8 में यह बढ़कर 438 तक पहुंच गया। आईआईटी दिल्ली के आसपास 443 और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 428 का स्तर दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों ने एक बार फिर राजधानी में वायु प्रदूषण की चुनौती को सामने ला दिया है। खास बात यह है कि त्योहार के दिन भी दिल्लीवासियों को साफ हवा नसीब नहीं हो सकी।
पांच शहरों की हवा में कितना अंतर?
देश के पांच प्रमुख शहरों के उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो वायु प्रदूषण की स्थिति में काफी अंतर दिखाई देता है।
– दिल्ली: कई निगरानी केंद्रों पर AQI 428 से 443 के बीच, गंभीर श्रेणी।
– पटना: सुबह आठ बजे AQI 172 दर्ज किया गया।
– लखनऊ: वायु गुणवत्ता सूचकांक 224 रहा।
– मुंबई: AQI 130 दर्ज किया गया।
– चंडीगढ़: AQI 67 के साथ अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा।
इन आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। पटना और लखनऊ में भी हवा संतोषजनक नहीं थी, जबकि मुंबई में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में पांचों शहरों के मुकाबले हवा की गुणवत्ता बेहतर रही।
AQI के 400 पार होने का क्या है मतलब?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों के स्तर के आधार पर उसकी गुणवत्ता बताता है। इसके माध्यम से यह समझा जा सकता है कि वातावरण में मौजूद प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है।
CPCB के निर्धारित मानकों के अनुसार:
– 0 से 50: अच्छा
– 51 से 100: संतोषजनक
– 101 से 200: मध्यम
– 201 से 300: खराब
– 301 से 400: बहुत खराब
– 401 से 500: गंभीर
इस लिहाज से दिल्ली के कई इलाकों में दर्ज 400 से अधिक AQI बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर वायु प्रदूषण का असर केवल पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं रहता। स्वस्थ व्यक्तियों को भी ऐसी हवा में सांस लेने से परेशानी हो सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, हृदय रोग या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से खांसी, गले में जलन, आंखों में परेशानी, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
त्योहार की रोशनी के बीच साफ हवा की चुनौती
दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर हर साल वायु प्रदूषण की चर्चा तेज हो जाती है। हालांकि, किसी एक दिन के प्रदूषण स्तर को केवल पटाखों का परिणाम बताना उचित नहीं होगा। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, मौसम की परिस्थितियां और अन्य स्थानीय स्रोत भी प्रदूषण को प्रभावित करते हैं।
विशेष रूप से सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति प्रभावित होने से प्रदूषण लंबे समय तक बना रह सकता है।
दीपावली की सुबह दिल्ली के आंकड़े इसी गंभीर चुनौती की ओर इशारा करते हैं। त्योहार का उत्साह अपनी जगह है, लेकिन स्वच्छ हवा में सांस लेना भी आम नागरिकों का बुनियादी स्वास्थ्य अधिकार है।
अब सवाल केवल यह नहीं है कि दीपावली पर कितनी रोशनी हुई, बल्कि यह भी है कि आने वाली सुबह लोगों को सांस लेने के लिए कितनी साफ हवा मिलेगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय उपाय भी उतने ही जरूरी हैं।
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