नक्सलमुक्त बस्तर के जंगलों में अब भी छिपे हैं विस्फोटकों के जखीरे, दो दिन में दो बड़े डंप बरामद

बीजापुर में 711 बीजीएल सेल के बाद 955 डेटोनेटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले, आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बल चला रहे सर्च ऑपरेशन
बीजापुर 07/11/26 । बस्तर को सशस्त्र नक्सल गतिविधियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद भी जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की तलाश सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले में पिछले 48 घंटों के भीतर नक्सलियों के दो बड़े डंप बरामद किए गए हैं। एक ओर पदेटल गांव के जंगल से 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) सेल मिले, वहीं दूसरी ओर उसूर थाना क्षेत्र के पुजारीकांकेर जंगल में छिपाकर रखे गए 955 डेटोनेटर सहित बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री बरामद की गई है।
बीजापुर पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात पुजारीकांकेर के जंगल में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान यह सफलता मिली। अभियान में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशिष्ट इकाई कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन (कोबरा) की 204वीं बटालियन और जिला बल के जवान शामिल थे। संयुक्त सर्च पार्टी को खुफिया सूचनाओं के आधार पर जंगल में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए डंप का पता चला।
इलेक्ट्रॉनिक और गैर-इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर का बड़ा जखीरा
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, बरामद सामग्री में 455 इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर और 500 गैर-इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर शामिल हैं। इसके अलावा दो मल्टीमीटर, रेडियो सेट की दो बैटरी चार्ज कप, दो कॉपर प्रोटोटाइपिंग बोर्ड (सीपीबी), एक मल्टी-यूएसबी पोर्ट कार्ड रीडर, मोबाइल चार्जर और लैपटॉप एडॉप्टर भी बरामद किए गए हैं।
तलाशी के दौरान 12 वोल्ट एफएम/एएम रिट्रैक्टेबल पावर एंटीना, टेलीस्कोपिक एंटीना, नक्सली साहित्य तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी मिली है। बरामद उपकरणों की मौजूदगी से स्पष्ट है कि डंप में केवल विस्फोटक ही नहीं, बल्कि संचार और तकनीकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी छिपाकर रखी गई थी।
48 घंटे में दूसरी बड़ी बरामदगी
बीजापुर में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब इससे ठीक एक दिन पहले पदेटल गांव के समीप जंगल में सुरक्षा बलों ने 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) सेल बरामद किए थे। लगातार दो बड़ी बरामदगियों ने यह संकेत दिया है कि नक्सली गतिविधियों के दौरान जंगलों में बनाए गए पुराने ठिकानों और छिपे हुए भंडारों की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है।
सुरक्षा एजेंसियां अब इन इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं, ताकि आत्मसमर्पण से पहले माओवादी संगठनों द्वारा छिपाए गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री को बाहर निकाला जा सके।
आत्मसमर्पित नक्सलियों की सूचना बनी अहम कड़ी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जंगलों में छिपाकर रखे गए इन डंपों का पता आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली सूचनाओं के आधार पर लगाया जा रहा है। बताया गया है कि नक्सलियों ने आत्मसमर्पण से पहले पुराने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हथियारों और विस्फोटक सामग्री को अलग-अलग स्थानों पर छिपा दिया था।
अब आत्मसमर्पित कैडरों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बल उन संभावित ठिकानों की पहचान कर रहे हैं। इससे जंगलों में लंबे समय से छिपे विस्फोटकों और तकनीकी उपकरणों को बरामद करने में मदद मिल रही है।
नक्सलमुक्ति के बाद सुरक्षा की नई चुनौती
गौरतलब है कि 31 मार्च 2026 को बस्तर को सशस्त्र नक्सल गतिविधियों से मुक्त घोषित किया गया था। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री को खोजने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं।
नक्सल विरोधी अभियानों का एक महत्वपूर्ण चरण अब उन पुराने ठिकानों और डंपों को चिन्हित करना है, जहां हथियार और विस्फोटक वर्षों से छिपाकर रखे गए हो सकते हैं। बीजापुर में लगातार हुई इन बरामदगियों से स्पष्ट है कि सशस्त्र नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से जंगलों की निगरानी और छिपी सामग्री की बरामदगी का काम महत्वपूर्ण बना हुआ है।
फिलहाल पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से तलाशी अभियान जारी रहने की जानकारी दी गई है। इन बरामदगियों के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जंगलों में छिपाए गए ऐसे अन्य डंपों का पता लगाने में सुरक्षा एजेंसियों को कितनी सफलता मिलती है।
अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️