डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत पर उठे सवाल: परिजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप, अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई

Journalist Amardeep Chauhan
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लैलूंगा। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लैलूंगा थाना क्षेत्र स्थित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) में डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट की है।
रात में प्रसव पीड़ा, रेफर के बाद लैलूंगा पहुंची गर्भवती
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम ऐंकरा (ग्राम पंचायत तोलगे) निवासी 30 वर्षीय वीना सिदार को 10 सितंबर की देर रात करीब 1 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन और गांव की मितानिन उन्हें तत्काल लमडांड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्रारंभिक जांच के बाद बेहतर सुविधा के लिए लैलूंगा स्थित मातृ-शिशु अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन सुबह लगभग 4 बजे महिला को लेकर लैलूंगा अस्पताल पहुंचे।
परिजनों का आरोप—डॉक्टर नहीं थे मौजूद, नर्सों ने कराई डिलीवरी
पीड़िता के पति रामरतन सिदार का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के समय कोई स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। उनका कहना है कि अस्पताल में मौजूद नर्सों को जगाकर डिलीवरी कराई गई। परिजनों के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजे तक डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे और इसी दौरान नवजात की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने इसे सीधी लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होते, तो शायद नवजात की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद परिजन नवजात के शव को लेकर गांव लौट गए और अंतिम संस्कार किया। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष—पहले ही हो चुकी थी नवजात की मौत
मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को नकारते हुए अलग तस्वीर पेश की है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. धरम साय पैंकरा के अनुसार, महिला को रेफर होकर अस्पताल लाया गया था और पहुंचते ही तत्काल डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा कि नवजात की मौत अस्पताल में डिलीवरी के दौरान नहीं, बल्कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही गर्भ में हो चुकी थी।
डॉक्टर की अनुपस्थिति के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट किया कि रात में एक महिला डॉक्टर की ड्यूटी निर्धारित थी, जो उस समय इमरजेंसी में दूसरे मरीज का इलाज कर रही थीं। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचीं और डिलीवरी उनकी निगरानी में ही संपन्न हुई। बीएमओ ने यह भी जोड़ा कि सामान्य प्रसव प्रक्रिया में प्रशिक्षित नर्सों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और यह नियमित चिकित्सीय व्यवस्था का हिस्सा है।
जांच की मांग के बीच सच सामने आने का इंतजार
घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा ढांचे को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर परिजन लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन अपने दावों पर कायम है। ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल, यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों और निगरानी की आवश्यकता की ओर संकेत करती है, जहां समय पर उपचार और विशेषज्ञों की उपलब्धता किसी भी जीवन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
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